रविवार, 24 सितंबर 2023

हया का परदा

 नफरत नहीं दिलों से प्यार मांगते हैं।।

नफरत नहीं दिलों से प्यार मांगते हैं,
चेहरे की मुस्कुराहटों का राज माँगते हैं।।
अनमोल जिंदगी है, मत यूं ही गुजार दो।
मिले जहाँ खुशी, वो बाजार माँगते हैं।।
रिश्वत का दौर है, मंजिलें तलाश लो
क्या भरोसा वक्त का, इंसाफ माँगते हैं।।



चम्मच बिना निवाला भी अबतो
जब मुँह में जा नहीं सकता।
ये तो दुनियाँ है मेरे दोस्तों, 
सबको समझा नहीं सकता।।
बड़े जालिम हैं, यहाँ पर लोग
अपना किसे समझते हो?
अकेले अभी तलक हैं साथ चाहते हैं।।
इंसानों के शहर में इंसाफ माँगते हैं।।
आज अभी अकेले हैं
कल कोई तो साथ देगा
ये अगर साथ होंगे तो
वो भी साथ देंगे
गूंज उठेगा आसमां आवाज जब उठायेंगे
भरोसा दिला रहे  हैं कलम हम चलायेंगे
काटनी है दीवार जुल्म की,फरियाद डालते हैं
हथियार आप हैं, आपके जज्बात मांगते हैं।।



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     हया का पर्दा



नजर से हया का पर्दा हटा चुके हो
क्या असमतें अब  बचा सकोगे
नाजुक से बदन यूं दिखा रहे हो
पता नहीं अभी क्या क्या करोगे
खुले जिशम को ही फैसन बता रहे हो
जो पहने हैं कपड़े,उन्हें क्या कहोगे



मगर के आँसू यू बहा बहाकर
पता नहीं क्या जता रहे हो
तेरी आबरू के दुश्मन खुद तुम्हीं हो
जमाने को इल्जाम क्या दे सकोगे
हया का परदा हटा चुके हो
क्या असमतें अब बचा सकोगे



जिनके तराने तुम आज गा रहे हो
उनके दिलों से नफरतें क्या मिटा सकोगे
कागज की कश्तियाँ चला रहे हो
क्या कोई दरिया उतर सकोगे



जिसने न समझा अपना किसी को
उसे क्यों गले से लगा रहे हो
दगा के बदले वफा चाहते हो
गद्दारी की नीयत क्या छुपा सकोगे?
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       🥀 मालचन्द कन्नौजिया बेपनाह

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