बुधवार, 13 सितंबर 2023

जिसे अपना समझा

 जिसे अपना समझा था

जिसे अपना समझा था अपने भुलाकर
दुनिया भुला दी मैंने सबकुछ लुटाकर
वही आज मुझको ठुकरा गई है
मेरे दिल पर गहरा जखम दे गई है।।

जिसके सपनों में अक्सर मैं आता रहा
जिसकी साँसों में हरदम समाया रहा
उसकी नगरी में आकर मैं पछता रहा हूँ
फेर ली निगाहें उसने, पलट कर ना देखा
अब किस तरह दिल को अपने समझाऊँ
राहें बिछुड़ गईं,अब कहाँ जाऊँ
मंजिलें भी अब मुझसे यही कह रही हैं
ये दुनियां नहीं तेरे काबिल बची हैं।
जीना सकूंगा मैं तो जीवन से हारा
माझी भी छोड़ गया मिला किनारा
डूबती नइया का नहीं है सहारा
चाहा था जिसको वही जब नहीं है
मेरे खातिर दुनियां कुछ भी नहीं है

अगर जानता मैं कि तूँ बेवफा है
निगाहों में तेरी जादू भरा है
होठों पे तेरे जो मुस्कान रहती है
उसमें भी नागिन का ज़हर भरा है
ना दिल को लगाता न ये

अंजाम होता

टूटा हुआ ये दिल मेरा किसी काम का नहीं है

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