महिला नागा संयासियों की स्थिति
महिला नागा संयासियों की जीवन गाथा ही कुछ अलग होती है।
जब बात सनातन धर्म की हो और नागा साधुओं का जिक्र न किया जाय तो सनातन अधूरा ही समझा जाता है।कौन होते हैं ये नागा साधू?उनके रहन सहन खानपान कैसे होते हैं।तमाम जानकारी के साथ आज हम कुछ खास चरित्र का वर्णन करेंगे।जैसा कि मन में सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या नागा लोग नंगे बदन निर्वस्त्र होकर रहते हैं तो उसका उत्तर होगा कि हाँ।उनके नग्नता के कारण ही शायद उन्हें नागा कहा जाता है।उनके निर्वस्त्र होकर रहने के कारण उन्हें दिगम्बर भी कहते हैं।आकाश ही उनके वस्त्र हैं,ऐसा उनका मानना होता है।कुछ बच्चे बचपन में ही इनके साथ घर से निकल जाते हैं तो कुछ लोग कुछ बड़े होने के बाद।जिसके भीतर जब वैराग्य उत्पन्न हो जाय।वैरागी जीवन बिताने के लिए निकल पढ़ते हैं।पुरुषों की भाँति कुछ महिलाओं को भी नागा संयासी के रूप में देखा गया है।
महिलाओं से भी अधिक श्रृंगार करते हैं नागा
नागाओं के सत्रह श्रृंगार के बारे में पूछे जाने पर यह जानकारी प्राप्त हुई , उन्होंने बताया कि नागा साधू लंगोट, भभूत, चंदन, पैरों में लोहे या फिर चांदी का कड़ा, अंगूठी, पंचकेश, कमर में फूलों की माला, माथे पर रोली का लेप, कुंडल, हाथों में चिमटा, डमरू या कमंडल, गुथी हुई जटाएं और तिलक, काजल, हाथों में कड़ा, बदन में विभूति का लेप और बाहों पर रूद्राक्ष की माला जो कि 17 श्रृंगार में शामिल होते हैं,जिनसे नागा सजधजकर शाही स्नान के लिए निकलते हैं। नागा संत लोग नित्य क्रिया करने के बाद खुद को शुद्घ करने के लिए गंगा स्नान करते हैं, लेकिन नागा संन्यासी शुद्घीकरण के बाद ही शाही स्नान के लिए निकलते हैं।
महाकुम्भ में देखने को मिला जिससे नागा सन्यासियों की एक खासियत थी जोकि इनका मन बच्चों के समान निर्मल होता है। ये अपने अखाड़ों में हमेशा धमा-चौकड़ी मचाते रहते हैं। इनका मठ इनकी अठखेलियों से गूंजता रहता है।लेकिन सभी नागा सरल स्वभाव वाले नहीं होते।यह भी कोई मिथ्या नहीं है।महानिर्वाणी, जूना अखाड़ाऔर निरंजनी अखाड़ों में सबसे अधिक नागा साधुओं की तादाद बतायी जाती है।
महिलाएं कठिन तपस्या के बाद नागा साधु बनती हैं. इसके लिए उन्हें सालों तक कठिन तपस्या करनी पड़ती है, जीते जी अपना पिंडदान करना पड़ता है, सिर मुंडवाना पड़ता है और तब कहीं जाकर महिला नागा साधु बनती है. ये महिला नागा साधु दुनिया से दूर जंगलों, गुफाओं और पहाड़ों पर रहती हैं और भगवान की भक्ति में लीन रहती हैं. हालांकि पुरुषों की तरह महिला नागा साधु निर्वस्त्र नहीं रहती हैं, बल्कि वे कपड़े पहनती हैं.
क्या पहनती हैं महिला नागा साधु?
जैसा कि हम सभी को मालुम ही है कि महिलाओं में उनके बाल (केस) रखने का बड़ा महत्व होता है।कोई भी महिला चाहे वह छोटी बच्ची हो या युवती लम्बे लम्बे केस रखती हैं।इससे उनकी सुन्दरता में निखार आ जाती है अब महिला नागा साधु भी तो आखिर में महिलाएं ही होती हैं ।इसलिए उनके केस तो लम्बे होते ही हैं अब उसे महिला नागा साधू जटाएं बना कर रखती हैं, माथे पर तिलक लगाती हैं और शरीर पर राख लपेटती हैं। यानी कि बाकी नागा साधुओं की तरह ही रहती हैं ।लेकिन बिना कपड़ों के रहने की बजाय गेरुए रंग का एक वस्त्र भी धारण करती हैं. महिला नागा साधु का ये वस्त्र बिना सिला हुआ होता है, जिससे वे अपने तन को ढंकती हैं.
कब दर्शन देती हैं महिला नागा साधु
महिला नागा साधु कुंभ, महाकुंभ जैसे खास मौकों पर ही लोगों के सामने आती हैं।जिससे लोग उन्हें देख पाते हैं।गंगा जैसी पवित्र नदियों के संगम में स्नान के बाद वे जल्द ही गायब भी हो जाती हैं।यही वजह है कि बहुत कम लोग ही महिला नागा साधुओं के दर्शन कर पाते हैं। यहां तक कि इंटरनेट पर महिला नागा साधुओं के फोटो भी बहुत कम मिल पाते हैं।
महिला नागा साधु (Female Naga Sadhu) बनने के लिए शरीर में भी कई तरह के बदलाव करने पड़ते हैं. पुरुष नागाओं की तरह इन्हें भी मुंडन करवाना पड़ता है. इसके अलावा उन्हें अपने गुरु को विश्वास दिलाना पड़ता है कि वे अपने परिवार से दूर हो चुकी हैं और अब उन्हें किसी भी बात का मोह नहीं है. नागाओं की दुनिया में किसी भी तरह के मोह-माया की इजाजत नहीं होती है. ये खुद को भगवान के चरणों में समर्पित कर चुके होते हैं. कई वर्षों की कठिन परीक्षाओं के बाद कोई महिला नागा साधु बन पाती है.



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