गीत
भगवान किस कुसूर की देदी मुझे सजा
भगवान किस कुसूर की दे दी मुझे सजाकमी क्या हुई तेरी पूजा में मुझसे
मेरी पूजा को मुझसे जुदा कर दिया
बहुत था भरोसा मेरे भोलेबाबा
झोली भरने से पहले क्यों खाली कर दिया।।जयजय शंभू.. जयजय शंभू।
चाहत की बगिया को दोनों सींचते थे
तेरी चौखट पर दोनों ही माथा टेकते थे
उसने भी दिल से मुझे माँगी तुमसे
मैंने भी उसको ही माँगा था तुमसे
अगर मेरी अर्जी मंजूर ना थी
इबादत में मेरी कोई गर खता थी
मेरे दिल में प्यार की जगह तुमनें क्यों दी।जयजय शंभू
बहुत दुख सहा हूँ,
अब और मत रुलाओ
मेरी आँखों सेअश्कों को
और ना बहाओ.
दिल को क्या पता था
इन आँखों की मस्तियाँ
इकदिन कलेजे को
घायल कर देंगी।
मेरे उन गुनाहों की इतनी सजा मिलेगी
बिखरी हुई मोहब्बत, टूटा हुआ ये दिल
लेकर कहाँ जाऊं
कुछ तो बता के जा
कब तक जीयें इस हाल में
मर्जी तेरी है क्या? जयजयशंभू.......



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