शुक्रवार, 12 जुलाई 2024

कुन्ती और कृष्ण

कुन्ती और श्रीकृष्ण के बीच आपसी रिश्ता

महाभारत के दो सबसे प्रमुख पात्र  :  श्रीकृष्ण एवं अर्जुन

     श्रीकृष्ण और अर्जुन महाभारत के दो सबसे प्रमुख पात्र हैं। आज आप समझ लीजिए कि वे दोनों केवल मित्र  ही नहीं थे, बल्कि करीबी रिश्तेदार भी थे। यह बात कोईअपनी मन गढंत कल्पना नहीं है बल्कि महाभारत के प्रसंगों से पता चलता है कि अर्जुन की मां कुंती यदुवंशी राजा शूरसेन की पुत्री थीं। भगवान कृष्ण के पिता वसुदेव जी कुंती के छोटे भाई थे।

 अर्जुन के मामा जी के पुत्र थे श्रीकृष्ण

इस तरह अर्जुन की माता कुंती भगवान श्रीकृष्ण,उनके बड़े भारी बलराम और बहन सुभद्रा की बुआ थीं और अर्जुन और कृष्ण आपस में ममेरे-फुफेरे भाई थे। ये रिश्ता बहुत आज भी बहुत करीबी माना जाता था।

कुंती की  वह कहानी जो कुछ ही लोग जानते हैं 

    कुंती का एक नाम पहले पृथा था और वे यदुवंशी राजा शूरसेन की पुत्री और वसुदेव और सुतसुभा की बड़ी बहन थी। बाद में उसके निःसंतान नागवंशी चाचा महाराज कुंतीभोज ने राजा शूरसेन से कुंती को गोद ले लिया था ,क्योंकि उनके पास कोई संतान नहीं थी।उन्होंने ही उनका नाम पृथा से कुंती रख दिया। 

कुंती का विवाह

    कुंती हस्तिनापुर के नरेश महाराज पांडु की पहली पत्नी थीं। यही कारण है कि अर्जुन को अपनी मां के नामों से पार्थ और कौन्तेय कहा जाता है।


अर्जुन और सुभद्रा का विवाह

      महाभारत की कहानी के अनुसार अर्जुन ने कई विवाह किए थे। द्रौपदी के बाद उन्होंने भगवान कृष्ण की बहन सुभद्रा से विवाह किया था। अर्जुन और सुभद्रा रिश्ते में ममेरे-फुफेरे भाई-बहन थे। कहते हैं अर्जुन द्रौपदी से ज्यादा सुभद्रा से प्यार करते थे। उनके लिए सुभद्रा से विवाह करना आसान नहीं था। यह बात भगवान श्रीकृष्ण भी जानते थे और उन्होंने सखा अर्जुन की इस संबंध में सहायता भी की।

सुभद्रा और अर्जुन का विवाह स्वयं श्रीकृष्ण के सहयोग से हुआ

   सुभद्रा वसुदेव एवं रोहिणी की संतान थीं।रोहिणी वसुदेव की ही दूसरी पत्नी थीं।इस प्रकार सुभद्रा श्रीकृष्ण की सौतेली बहन थीं।लेकिन फिर भी परिवार के लोग यह विवाह करने के पक्ष में बिल्कुल नहीं थे।जब सुभद्रा का स्वयंवर रचाया गया तो अर्जुन उन्हें भगा ले गये और शादी कर लिए।

इसलिए भगवान कृष्ण ने दिया साथ

सुभद्रा वसुदेव और रोहिणी की संतान थीं।  वे श्रीकृष्ण की सगी बहन न होकर सौतेली बहन हुईं। लेकिन फिर भी परिवार के लोग इसके लिए राजी नहीं थे और इसलिए सुभद्रा के स्वयंवर में अर्जुन ने श्रीकृष्ण के कहने पर सुभद्रा को भगा ले जाने की सलाह दी और भगा ले जाने के लिए अपना रथ भी दिया था।

     

अभिमन्यु का जन्म

 अर्जुन और सुभद्रा के मिलन से ही अभिमन्यु ने जन्म लिया।अभिमन्यु को तो सभी लोग जानते हैं कि उसने अपनी माँ के गर्भ से ही रण कौशल सीख रहा था।जिस चक्रव्यूह की रचना महाभारत युद्ध में कई महारथियों ने मिलकर किया था और जिसे अर्जुन के सिवा कोई भी भेदन करने में सक्षम नहीं था, उसे तोड़ने की कला अभिमन्यु ने अपनी माँ के गर्भ में ही सीख लिया था।

     

अर्जुन को सुभद्रा से विवाह करने में श्रीकृष्ण की भूमिका

         दरअसल, भगवान श्रीकृष्ण त्रिकालदर्शी थे। वे जानते थे कि सुभद्रा के गर्भ से ही अभिमन्यु जन्म तय है और उसका पुत्र आगे पांडव वंश को आगे बढ़ाएगा। इसलिए वे इस विवाह के पक्ष में थे। दूसरी महत्वपूर्ण बात भगवान कृष्ण और कुंती का सौहार्द्रवश बुआ बोलते थे। कहा जाता है कि  महाराज कुंतीभोज द्वारा कुन्ती को गोद ले लिए जाने के बाद उनका (कुन्ती) का आचरण वसुदेव जी के वंश का नहीं रह गया था। वह पूरी तरह से वसुदेव की पुत्री न होकर वे खुद को कुन्तीभोज की ही पुत्री समझने लगी थीं।जिससे श्रीकृष्ण उसे बुआ जानते हुए भी  उनके पुत्र और अपने मित्र अर्जुन का विवाह सुभद्रा से करवाने में अर्जुन का सहयोग किया।

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