सोमवार, 8 अप्रैल 2024

आतंकवादियों से कैसी सहानुभूति (कविता)

 आतंकवादियों से सहानुभूति कैसी 💐

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सहानुभूति है दिल में अगर तो पोछो आँसू उनके
आतंकवाद की भेंट चढ़ गये,जिनके कोई अपने।।

कैसी हमदर्दी दहशतगर्दों से,जो कर्म घिनौने करते हैं
ऐ राजनीति करनेवालों अब छिपा नहीं है जो करते हैं

वो दिल्ली की संसद रही हो, या हो कोई लोक अदालत
हैदराबाद, जयपुर हो चाहे अयोध्या हो चाहे होय बनारस।

सबन वो दिन देखे हैं, गम झेले हैं; दर्द से अभी कराहत
फिर भी कहते हो बेगुनाह उन्हें तुम,मिलती होगी राहत।।

बटला हाउस, ट्राइटेंड ओबेरॉय, बयां कर रहा होटलताज
खुलकर हुई मुठभेड़ जहाँ पर, जान गई हैं बोल दो साच

अरे बुजदिल दहशतगर्दों, कैसा मजहब है ये तुम्हारा
कैसा ये जेहाद भला है, क्यों करते हो खून खराबा।।

किस धर्म ग्रंथ को पढ़कर, ऐसी राहों पर चलते हो
ऐसा करने से पहले, नहीं खुदा से अपने डरते हो

जब जलेगा घर किसी बेगुनाह का,
किसी की मांग का सिंदूर जब उजड़ेगा
तो उसकी लपटों से ऐ जालीम सुनो
तेरा भी मकान खुद राख होगा

चलते रहे गर इसी राह पर तो
एकदिन तुमभी बेमौत मरोगे
इतना ही नहीं मरने के बाद
गजभर कफन, मुट्ठीभर मिट्टी
को भी तुम तरसोगे
तेरे अपने भी लाश तेरी
पहचानने से कतरायेंगे

खाकी और खादी वालों मत दामन में दाग लगाओ तुम
रहे सलामत ये वतन तुम्हारा, ऐसा मन में ठानों तुम

करो नमन उस नौजवानों को, जिसने जान कुर्बान किया
देश की खातिर प्राण गँवाकर भारत माँ की शान रखा

मोहनचन्द शर्मा, हेमंत करकरे या कोई भारत का वासी
मरकर भी वे अमर हो गये, ऐसी किस्मत उसने पायी

ऐ सफेदपोश खद्दरधारी, मत बनो इतने तुम ब्यभिचारी
देश ये सबसे ऊपर है, फिर बाद मेंआती दुनियादारी

आतंकियों और दहशतगर्दों का पक्ष यदि ऐसे लोगे
सजा का उनके विरोध जताकर देश को क्या संदेश दोगे

ना अपने जो हो सकते हैं भला तुम्हारे क्या होंगे
कब समझेंगे फितरत उनकी, आस्तीन सांप जिलाओगे

रंगेहाथ पकड़े जाने पर भी कहते, निर्दोष उन्हें हो
फिर दोसी कौन हैं, तुम्हीं बतलादो,तुमतो पूरे होश में हो

ऊब चुके हैं सुनसुन कर,राजनीति कुछ ऐसी करते हो
संयासियों को आतंकवादी कहते हो,राष्ट्रवादी बनते हो

आतंक वादियों दहशतगर्दों से सुनो प्रेम दर्शानेवालों
मत जोड़कर देखो जातधरम से,फाँसी को गलत बताने वालों
जराठहरो होश में आओ,उनसे मत इतना प्रेम जताओ
वो ना तेरे ना मेरे हैं, उनके मरने का मत शोक जताओ

हर जगह गर राजनीति करोगे, उनकी मंशा को ठीक कहोगे
देश से अपने गद्दारी करके देश छोड़कर कहाँ रहोगे

उनकी ही भाषा तुम भी यदि राजनीति में बोलोगे
यकीनन समझलो बंधु,तुम भी संदिग्ध लगोगे।।

निर्लज्जता की हद होती है, कबतक मालचन्द समझाओगे
किये की सजा उन्हें अवश्य मिलेगी,ऐसा कभी सुन पाओगे।
           

                      ------   मालचन्द कन्नौजिया बेपनाह

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