सोमवार, 1 जनवरी 2024

भारत के विभाजन की कहानी

 भारत के विभाजन की कहानी



इतिहास के पन्नों में भारत को दो राष्ट्र में बांटने की पटकथा सन् 1947 में नहीं बल्कि उससे 10 साल पहले ही प्रयागराज जिसे मुगल काल में ही इलाहाबाद का नाम दे दिया गया था जो अब पुनः प्रयागराज कहा जाता है, में लिखी गई थी।

30 दिसंबर 1930 को मुस्लिम लीग के 21 वें अधिवेशन में मो. इकबाल ने सबसे पहले मुस्लिमों के लिए अलग राष्ट्र की मांग की थी। उन्होंने पंजाब, उत्तर पश्चिम सीमांत प्रांत, सिंध और बलूचिस्तान को एक राष्ट्र के तौर पर मांगा था जो भारत और ब्रिटिश साम्राज्य से अलग हो।

मो. इकबाल ने क्या कहा था?

इलाहाबाद में मुस्लिम लीग के 21 वें अधिवेशन में मो. इकबाल ने लंबा-चौड़ा अध्यक्षीय भाषण दिया था।इसमें उन्होंने मुस्लिम हकों की रक्षा की मांग भी उठाई थी।उन्होंने कहा था कि- ‘मैं व्यक्तिगत तौर पर पंजाब, उत्तर-पश्चिम सीमांत प्रांत, सिंध और बलूचिस्तान को एक राज्य के तौर पर देखना चाहूंगा। ब्रिटिश साम्राज्य के भीतर या ब्रिटिश साम्राज्य के बिना स्वशासन, एक समेकित उत्तर-पश्चिम भारतीय मुस्लिम राज्य का गठन मुझे कम से कम उत्तर-पश्चिम भारत के मुसलमानों की नियति प्रतीत होता है।"

नेहरू समिति ने अस्वीकार कर दिया था प्रस्ताव

मो. इकबाल ने अपने संबोधन में कहा था कि ‘स्वतंत्र मुस्लिम राज्य की मांग को नेहरू समिति के समक्ष रखा गया। उन्होंने इसे इस आधार पर अस्वीकार कर दिया कि, यदि इसे लागू किया गया, तो बोझिल हालात पैदा होंगे।" मो. इकबाल ने कहा था कि जहां तक ​​क्षेत्र का संबंध है, यह सच है। इस प्रस्ताव के द्वाराही यह विचार किया गया कि राज्य वर्तमान भारतीय प्रांतों में से कुछ से बहुत कम होगा। इकबाल ने कहा था कि -‘इस विचार से हिंदुओं या अंग्रेजों को चिंतित होने की जरूरत नहीं है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम देश है। देश में एक सांस्कृतिक शक्ति के रूप में इस्लाम का जीवन काफी हद तक एक निर्दिष्ट क्षेत्र में इसके केंद्रीकरण पर निर्भर करता है।भारत के साथ-साथ ये एशिया की समस्या का समाधान करेगा।

कौन थे मो. इकबाल

मो. इकबाल का मसऊदी एक कवि, दार्शनिक और राजनेता थे।उनका जन्म 9 नवंबर 1877 को सियालकोट में हुआ था। वह मूल रूप से कश्मीर के थे। ऐसा दावा किया जाता है कि उनके परदादा का नाम सहज सप्रू था जो कश्मीरी पंडित थे। मशहूर लेखक खुशवंत सिंह ने सन् 2007 में द ट्रिब्यून में प्रकाशित एक आर्टिकल में इसका जिक्र किया था।उन्होंने लिखा था कि अल्लामा इकबाल के पूर्वज कश्मीरी हिंदू थे।उनके परदादा बीरबल सप्रू थे।बीरबल के तीसरे बेटे कन्हैया लाल अल्लामा इकबाल के दादा थे।बाद में वह सियालकोट गए और वहां मुस्लिम धर्म अपना लिया।

अल्लामा इकबाल की प्रमुख रचनाओं में असरार ए खुदी, बंग-ए-दारा और तराना-ए-हिंद है। मो. इकबराल को इस्लाम के धार्मिक और राजनीतिक दर्शन पर लिखने के लिए भी जाना जाता है।

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