मतदान को त्योहार की तरह मनाया जाना चाहिए
चुनाव को त्योहार की तरह मनाया जाना चाहिए
चुनावी मुद्दा
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने कभी सदन में अपने भाषणों में भी यह कहा था कि जनता देख रही है.... पूरा भाषण यहाँ सुन सकते हैं।
जब सदन में गूँजने लगा मोदीजी का यह भाषण
https://twitter.com/indiatvnews/status/1731214271009435891?ref_src=twsrc%5Etfw%7Ctwcamp%5Etweetembed%7Ctwterm%5E1731214271009435891%7Ctwgr%5E7ef63cdb73a0821ba4cd1efcb29a4f29af485e24%7Ctwcon%5Es1_c10&ref_url=http%3A%2F%2Fapi-news.dailyhunt.in%2F
जातिपाँति से ऊपर उठकर मतदान करना चाहिए
जनता को जाति पाँत धर्म द्वेष पार्टी आदि से बारह निकल कर एक अच्छा प्रत्याशी को चुनाव में वोट देकर उन्हें अपने क्षेत्र के विकास के लिए सदन में भेजने चाहिए।तब क्षेत्रीय विकास होगा।क्षेत्र का विकास होगा तो देश आगे बढ़ेगा।लेकिन जब हम जातिपाँति में उलझकर मतदान करने लगेंगे तो हमारी विकास की गति रुक जायेगी।
कुछ लोग मतदान करने की रुचि नहीं रखते
आज भी बहुत से लोग ऐसे हैं जो यह कहते हैं कि वोट देने से क्या लाभ, कोई हमें खर्चा दे रहा है क्या?हम अपना किसी को वोट नहीं देंगे तो ऐसी सोच वाले लोग आज भी हैं।उन्हें आजभी उतना ज्ञान नहीं है कि मतदान कितना महत्वपूर्ण होता है।उसे त्योहार समझना चाहिए और बढ़चढक़र अपने चहेते प्रत्याशी को वोट देकर अपना कर्तव्य निभाने चाहिए।लेकिन उन्हें शायद ये नहीं पता है कि उनके एक वोट से देश की दिशा बदल सकती है।
कुछ लोग वोट डालने में बहुत ही मनोरंजन कर लेते हैं
कुछ लोग तो वोट डालने में इतनी ज्यादा दिलचस्पी रखते हैं कि अपना तो वोट डालते ही हैं साथ में आठदस वोट दूसरे लोगों का भी चोरी छुपे डाल आते हैं।जबकि यह पूरी तरह से गलत है और ऐसा किसी को नहीं करना चाहिए।अगर कोई ऐसा करता है तो पुलिस उसे पकड़ कर उसे सजा भी दे सकती है लेकिन ऐसा होता नहीं है।और पकड़ने के बाद कुछ ही देर में उन्हें छोड़ दिया जाता है।जिससे फर्जी मतदान को बल मिल जाता है और कमोबेष लगभग सभी पार्टियों के सपोर्टर अपनी पार्टियों को जिताने के लिए इस तरह का काम करते हैं।
बचपन की कुछ यादें
आज से लगभग चालीस साल पहले की बात है मुझे आज भी अभी अच्छे से याद भी है, उस समय हमलोग बहुत छोटे थे तो चुनाव में जो भी प्रचार वाली गाड़ियाँ आती थीं तो उसके पीछे पीछे भागते थे।उनके फेंके गए बिल्ला और पर्चे इकट्ठा कर के बहुत खुश होते थे।हमें इससे कोई मतलब नहीं होता था कि यह किस दल का है।एकसाथ अनेकों पार्टियों के बिल्ले आलपिन से अपने कमीज की जेब पर लटका कर हम सभी बच्चे खूब मगन होते थे।उस समय हमें किसी भी पार्टी या किसी भी दल या किसी भी नेता के बारे में कोई जानकारी नहीं होती थी लेकिन जब चुनाव आता था तो सबसे ज्यादा बच्चों को खुशहाल देखा जाता था।जैसे लगता था कि यह चुनाव कोई बहुत बड़ा त्योहार है जिसे हिन्दू मुस्लिम सब मिलकर एक साथ मनाते हैं।बस इससे आगे कुछ नहीं।चाहे कोई जीते, कोई हारे, हम लोगों को कोई फर्क नहीं पड़ता था।
चुनाव आने की खुशी का अंदाजा नहीं था
चुनाव की घोषणा होते ही गाड़ियों में भोंपू (लाउडस्पीकर) बाँधकर उसे चिल्लवाती हुई गाड़ियों में आठ दस लोग बैठे होते।और गाँव की कच्ची सड़क पर धूल उड़ाते हुए धीरे धीरे आगे बढ़ती जाती थीं और एक साथ दसदस बीसबीस लड़के पर्चा माँगते पीछेपीछे भागते रहते थे और एकाध दो लड़के उसमें से गिरकर रोने भी लगते थे तो कभी जो बच्चे एक भी पर्चा नहीं लूट पाते तो वे भी रोते रोते घर लौट आते थे।इतनी खुशी शायद आज चुनाव के जीत और हार की खबरें सुनकर भी नहीं होती।बचपन के वो दिन भी क्या दिन रहे होंगे।
चुनाव को त्यौहार की तरह मनाया जाना चाहिए
हाँ,तो बात हम ये बता रहे थे कि पहले गरीब और दबे कुचले लोगों के अक्सर वोट तो दूसरे दबंग लोगों द्वारा पहले ही डाल दिया जाता था।अधिकारी बैठे रहते थे और उनके नाश्ता पानी की व्यवस्था गाँव के प्रधान को सौंप दी जाती थी और चुनाव ड्यूटी में तैनात कर्मचारी उनके लिए कभी कोई विरोध नहीं करते थे।और दो दो घंटे तक लोग लाइन में खड़े रहने के बाद जब उनके नाम का मिलान मतदाता सूची से किया जाता था तो अधिकांश लोगों को यह बताया जाता था कि आपका वोट तो पड़ गया है और बारह भेज दिया जाता था।अब बेचारे गरीब लोग किससे झगड़ा करें।अगर कोई अकड़ता तो पुलिस वाले बाँह पकड़ कर बाहर कर देते कि जाओ बाहर पता करो कि किसने तुम्हारा वोट डाल दिया।वाह, क्या जमाना था।लेकिन लेकिन आज जब जनता मतदान के प्रति जागरूक हुई है तो भी पूरी तरह से आज भी फर्जी मतदान बंद नहीं हुआ है।
फर्जी मतदान को रोकने के लिए इवीएम में सुधार करने की आवश्यकता है।
फर्जी मतदान को रोकने के लिए मतदाता पहचान पत्र जारी किया गया फिर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन आयी फिर आधार कार्ड बना और फिर उसे मतदाता पहचान पत्र से भी जोड़ा गया लेकिन फर्जी मतदान आज भी होते रहते हैं।ईवीएम में थोड़ा सा और सुधार कर दिया जाता तो जैसे कि आधार कार्ड से अंगूठा लगाकर सरकारी दुकान से राशन उठाया जाता है और दुबारा कोई चाहकर भी राशन धोखे से नहीं उठा सकता तो ठीक वैसे ही ईवीएम को भी संशोधित करने की आवश्यकता है जिससे मतदाता एकबार मतदान करने के उपरांत यदि दुबारा किसी और के नाम पर फर्जी मतदान करने की कोशिश करता है तो उसके अंगुलियों के निशान न होने के कारण वे पकड़ में आ जाते ।




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