रविवार, 5 नवंबर 2023

तंत्र, मंत्र , यंत्र विद्या

मंत्र साधना

      

मंत्र साधना
      

  मंत्र साधना भी एक विज्ञान की तरह ही होता है और अगर इसे सिद्ध कर लिया जाता है तो यह बहुत ही प्रभावशाली साबित होता है।

तंत्र- मंत्र - यंत्र
तंत्र का अर्थ तन से होता है, मंत्र का अर्थ मन से यंत्र का अर्थ होता यंत्रों या मशीनों से लगा हुआ होता है।

तंत्र-मंत्र  :-    मंत्र एवं तंत्र ये दोनों शब्द अलग अलग भाव और अर्थ लिए हैं।तंत्र विद्या के द्वारा तन को तनाव मुक्त भी किया जाता है और तनाव ग्रस्त भी ।मंत्र वह होता है जो मन के तंत्र को ताड़ दे,वह मंत्र होता है।

हिन्दू धर्मशास्त्रों में विस्तार पूर्वक इसका वर्णन ढूंढने से मिल सकता है।हम थोड़ा सा अंश यहां लिखकर समझते हैं।


मंत्र का अर्थ क्या है?


  'मंत्र' का अर्थ होता है , मन को एक तंत्र में बांधना।

   यदि अनावश्यक और अत्यधिक विचार उत्पन्न हो रहे हैं और जिनके कारण चिंता पैदा हो रही है, तो मंत्र सबसे कारगर औषधि है। आप जिस भी ईष्टदेव या देवी देवता भगवान की पूजा, प्रार्थना या ध्यान करते हैं, उसके नाम का जप सकते हैं।यह जपनाम ही वह मंत्र है जिससे आपके मन को शांति मिलती है।आब आप चाहे रामराम जपिये या राधेराधे कहिये।बात वही है,।वह हमारे जोभी ईष्ट देव हैं, हमारे मन की वह सब समझते हैं और इसलिए हमारी भाषा चाहे जोभी हो;उन्हें समझने में कोई भूल नहीं होती है।

मंत्र कितने प्रकार के होते हैं?

अब यहाँ मंत्र भी कई श्रेणियों में समझने के लिए आप बाँट सकते हैं।विद्वान लोगों के द्वारा बताया गया है कि
मंत्र 3 प्रकार के होते हैं।
1-सात्विक,
2- तांत्रिक और
3-साबर।
      सभी मंत्रों का अपना-अलग अलग महत्व समझाया गया है।
   1-सात्विक मंत्र :-   प्रतिदिन जपने वाले मंत्रों को सात्विक मंत्र माना जाता है। आओ जानते हैं कि ऐसे कौन से मंत्र हैं जिनमें से किसी एक को प्रतिदिन जपना चाहिए, जिससे मन की शक्ति ही नहीं बढ़ती, बल्कि सभी संकटों से मुक्ति भी मिलती है।

    इन मंत्रों के जप या स्मरण के वक्त सामान्य पवित्रता का ध्यान रखना होता है। जैसे घर में हो तो देवस्थान में बैठकर, कार्यालय में हो तो पैरों से जूते-चप्पल उतारकर इन मंत्र को पढ़ते हुए देवताओं का ध्यान करना चाहिए। बताया जाता है कि इससे मानसिक बल प्राप्त होता है
जो हमारे भीतर आत्मविश्वास बढ़ाने में मददगार साबित होता है।

कुछ मंत्र हमनें यहाँ लिया है तो यदि आप चाहते हैं तो इसे कंठस्थ करके जाप कर सकते हैं।

👉 क्लेशनाशक मंत्र : कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने। प्रणत क्लेशनाशाय गोविन्दाय नमो नम:॥

मंत्र प्रभाव :
इस मंत्र का नित्य जप करने से कलह और क्लेशों का अंत होकर परिवार में खुशियां वापस लौट आती हैं।

दूसरा मंत्र :

👉 शांतिदायक मंत्र : श्री राम, जय राम, जय जय राम

मंत्र प्रभाव :
हनुमानजी भी राम नाम का ही जप करते रहते हैं। कहते हैं राम से भी बढ़कर श्रीराम का नाम है। इस मंत्र का निरंतर जप करते रहने से मन में शांति का प्रसार होता है, चिंताओं से छुटकारा मिलता है तथा दिमाग शांत रहता है। राम नाम के जप को सबसे उत्तम माना गया है। यह सभी तरह के नकारात्मक विचारों को समाप्त कर देता है और हृदय को निर्मल बनाकर भक्ति भाव का संचार करता है।

तीसरा मंत्र :

👉 चिंता मुक्ति मंत्र : ॐ नम: शिवाय।

मंत्र प्रभाव :
इस मंत्र का निरंतर जप करते रहने से चिंतामुक्त जीवन मिलता है। यह मंत्र जीवन में शांति और शीतलता प्रदान करता है। शिवलिंग पर जल व बिल्वपत्र चढ़ाते हुए यह शिव मंत्र बोलें व रुद्राक्ष की माला से जप भी करें। तीन शब्दों का यह मंत्र महामंत्र है।

चौथा मंत्र :

👉 संकटमोचन मंत्र : ॐ हं हनुमते नम:।

मंत्र प्रभाव :
यदि दिल में किसी भी प्रकार की घबराहट, डर या आशंका है तो निरंतर प्रतिदिन इस मंत्र का जप करें और फिर निश्चिंत हो जाएं। किसी भी कार्य की सफलता और विजयी होने के लिए इसका निरंतर जप करना चाहिए। यह मंत्र आत्मविश्वास बढ़ाता है।

हनुमानजी को सिंदूर, गुड़-चना चढ़ाकर इस मंत्र का नित्य स्मरण या जप सफलता व यश देने वाला माना गया है। यदि मृत्युतुल्य कष्ट हो रहा है, तो इस मंत्र का तुरंत ही जप करना चाहिए।

पांचवां मंत्र :

शांति, सुख और समृद्धि हेतु :

भगवान विष्णु के वैसे तो बहुत मंत्र हैं, लेकिन यहां कुछ प्रमुख प्रस्तुत हैं।

1. ॐ नमो नारायण। या श्रीमन नारायण नारायण हरि-हरि।

2. ॐ भूरिदा भूरि देहिनो, मा दभ्रं भूर्या भर। भूरि घेदिन्द्र दित्ससि।।

ॐ भूरिदा त्यसि श्रुत: पुरूत्रा शूर वृत्रहन्। आ नो भजस्व राधसि।।

3. ॐ नारायणाय विद्महे।

वासुदेवाय धीमहि।

तन्नो विष्णु प्रचोदयात्।।

4.

त्वमेव माता च पिता त्वमेव।

त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव।।

त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव।

त्वमेव सर्व मम देवदेव।।

5.

शांताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशम्।

विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्।।

लक्ष्मीकान्तंकमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यम्।

वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्।।

मंत्र प्रभाव :

भगवान विष्णु को जगतपालक माना जाता है। वे ही हम सभी के पालनहार हैं इसलिए पीले फूल व पीला वस्त्र चढ़ाकर उक्त किसी एक मंत्र से उनका स्मरण करते रहेंगे, तो जीवन में सकारात्मक विचारों और घटनाओं का विकास होकर जीवन खुशहाल बन जाएगा। विष्णु और लक्ष्मी की पूजा एवं प्रार्थना करते रहने से सुख और समृद्धि का विकास होता है।

छठा मंत्र :

मृत्यु पर विजय के लिए महामृंत्युजय मंत्र :

👉 ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिंपुष्टिवर्द्धनम्।

उर्वारुकमिव बन्धानान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।।

मंत्र प्रभाव :
शिव का महामृंत्युजय मंत्र मृत्यु व काल को टालने वाला माना जाता है इसलिए शिवलिंग पर दूध मिला जल, धतूरा चढ़ाकर यह मंत्र हर रोज बोलना संकटमोचक होता है। यदि आपके घर का कोई सदस्य अस्पताल में भर्ती है या बहुत ज्यादा बीमार है तो नियमपूर्वक इस मंत्र का सहारा लें। बस शर्त यह है कि इसे जपने वाले को शुद्ध और पवित्र रहना जरूरी है अन्यथा यह मंत्र अपना असर छोड़ देता है।

यह होता है तंत्र विद्या

    हिन्दू धर्म के साथ ही बौद्ध और जैन धर्म में भी इस विद्या का प्रचलन है। 
आओ जानते हैं कि तंत्र विद्या के कुछ रहस्य...


1. तंत्र में शरीर है महत्वपूर्ण : साधारण अर्थ में कहा जाय तो तंत्र का अंर्थ तन से, मंत्र का अर्थ मन से और यंत्र का अर्थ किसी मशीन या वस्तु से होता है। तंत्र का एक दूसरा अर्थ होता है व्यवस्था। तंत्र मानता है कि हम शरीर में है यह एक वास्तविकता है। भौतिक शरीर ही हमारे सभी कार्यों का एक केंद्र है। अत: इस शरीर को हर तरह से तृप्त और स्वस्थ रखना अत्यंत जरूरी है। इस शरीर की क्षमता को बढ़ाना जरूरी है। इस शरीर से ही अध्यात्म को साधा जा सकता है। योग भी यही कहता है।



आजकल प्रायः मारण,उच्चाटन, वशीकरण आदि के लिए अनेकों प्रकार की सिद्धियों आदि के लिए तंत्र क्रियाओं को किया जाता है।यह शास्त्र मुख्यरूप से शाक्तों का ही रूप है।प्रायः अर्थहीन होकर एकाक्षरी हुआ करता है।जैसे ऐं,ह्रीं, क्लीं, श्रीं,शूं इत्यादि।
तांत्रिक मंत्र वह है जिसका उपयोग पूजा (पूजा) में और समस्याओं को हल करने में मदद के लिए किया जाता है । तांत्रिक मंत्रों की एक विस्तृत श्रृंखला है, प्रत्येक को किसी विशेष समस्या को हल करने के लिए डिज़ाइन किया गया यह विशेष महत्व का योगविद्या है।इसे बहुत आसान नहीं कहा जा सकता है।बिना किसी विद्वान गुरु की उपस्थित में कभी किसी भी तंत्र को नहीं सीखना चाहिए।इस दौरान बहुत बड़े संकट में पड़ सकते हैं।जबकि मंत्र के जाप करने के लिए आप स्वयं भी एकाग्रचित्त होकर मंत्र जाप कर सकते हैं।


मंत्र तीन प्रकार के होते हैं वैदिक मंत्र, तांत्रिक मंत्र और शाबर मंत्र. शाबर मंत्र से ज्ञान, मोक्ष ही नहीं बल्कि सांसारिक कार्य और सिद्धि प्राप्त की जा सकती है. शाबर मंत्र से तुरंत, विश्वसनीय, अच्छे और पूर्ण रूप से कार्य सिद्ध होते है.

भारत ही नहीं दुनियाभर में बहुत से लोग इस साबर मंत्र के नाम से अनभिज्ञ होते हैं।लेकिन जो इसके साधक हैं वे इसके बलबूते दुनियाँ को बदलने की ताकत रखते हैं।जैसे शंकर जी,हनुमानजी एवं इस कलयुग में बाबा गोरखनाथ जी ।
यह वह मंत्र होता है जो कि पारंपरिक योग भाषा संस्कृत से परे होती है।इसे किसी भाषा में लिखा व पढ़ा जा सकता है।या यूं कह लीजिये कि आम बोलचाल की गँवई भाषा में भी इसे सीखा तथा सिद्ध किया जा सकता है।




  मंत्र साधना भी एक विज्ञान की तरह ही होता है और अगर इसे सिद्ध कर लिया जाता है तो यह बहुत ही प्रभावशाली साबित होता है।

तंत्र- मंत्र - यंत्र

तंत्र का अर्थ तन से होता है, मंत्र का अर्थ मन से यंत्र का अर्थ होता यंत्रों या मशीनों से लगा हुआ होता है।

तंत्र-मंत्र  :-    

मंत्र एवं तंत्र ये दोनों शब्द अलग अलग भाव और अर्थ लिए हैं।तंत्र विद्या के द्वारा तन को तनाव मुक्त भी किया जाता है और तनाव ग्रस्त भी ।मंत्र वह होता है जो मन के तंत्र को ताड़ दे,वह मंत्र होता है।


हिन्दू धर्मशास्त्रों में विस्तार पूर्वक इसका वर्णन ढूंढने से मिल सकता है।हम थोड़ा सा अंश यहां लिखकर समझते हैं।


मंत्र का अर्थ क्या है?



  'मंत्र' का अर्थ होता है , मन को एक तंत्र में बांधना।

   यदि अनावश्यक और अत्यधिक विचार उत्पन्न हो रहे हैं और जिनके कारण चिंता पैदा हो रही है, तो मंत्र सबसे कारगर औषधि है। आप जिस भी ईष्टदेव या देवी देवता भगवान की पूजा, प्रार्थना या ध्यान करते हैं, उसके नाम का जप सकते हैं।यह जपनाम ही वह मंत्र है जिससे आपके मन को शांति मिलती है।आब आप चाहे रामराम जपिये या राधेराधे कहिये।बात वही है,।वह हमारे जोभी ईष्ट देव हैं, हमारे मन की वह सब समझते हैं और इसलिए हमारी भाषा चाहे जोभी हो;उन्हें समझने में कोई भूल नहीं होती है।

मंत्र कितने प्रकार के होते हैं?


अब यहाँ मंत्र भी कई श्रेणियों में समझने के लिए आप बाँट सकते हैं।विद्वान लोगों के द्वारा बताया गया है कि
मंत्र 3 प्रकार के होते हैं।

1-सात्विक,

2- तांत्रिक और

3-साबर।

      सभी मंत्रों का अपना-अलग अलग महत्व समझाया गया है।

   1-सात्विक मंत्र :-   

प्रतिदिन जपने वाले मंत्रों को सात्विक मंत्र माना जाता है। आओ जानते हैं कि ऐसे कौन से मंत्र हैं जिनमें से किसी एक को प्रतिदिन जपना चाहिए, जिससे मन की शक्ति ही नहीं बढ़ती, बल्कि सभी संकटों से मुक्ति भी मिलती है।


    इन मंत्रों के जप या स्मरण के वक्त सामान्य पवित्रता का ध्यान रखना होता है। जैसे घर में हो तो देवस्थान में बैठकर, कार्यालय में हो तो पैरों से जूते-चप्पल उतारकर इन मंत्र को पढ़ते हुए देवताओं का ध्यान करना चाहिए। बताया जाता है कि इससे मानसिक बल प्राप्त होता है
जो हमारे भीतर आत्मविश्वास बढ़ाने में मददगार साबित होता है।

कुछ मंत्र हमनें यहाँ लिया है तो यदि आप चाहते हैं तो इसे कंठस्थ करके जाप कर सकते हैं।

👉 क्लेशनाशक मंत्र : कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने। प्रणत क्लेशनाशाय गोविन्दाय नमो नम:॥

मंत्र प्रभाव :

इस मंत्र का नित्य जप करने से कलह और क्लेशों का अंत होकर परिवार में खुशियां वापस लौट आती हैं।

दूसरा मंत्र :

👉 शांतिदायक मंत्र : श्री राम, जय राम, जय जय राम

मंत्र प्रभाव :
हनुमानजी भी राम नाम का ही जप करते रहते हैं। कहते हैं राम से भी बढ़कर श्रीराम का नाम है। इस मंत्र का निरंतर जप करते रहने से मन में शांति का प्रसार होता है, चिंताओं से छुटकारा मिलता है तथा दिमाग शांत रहता है। राम नाम के जप को सबसे उत्तम माना गया है। यह सभी तरह के नकारात्मक विचारों को समाप्त कर देता है और हृदय को निर्मल बनाकर भक्ति भाव का संचार करता है।

तीसरा मंत्र :

👉 चिंता मुक्ति मंत्र : ॐ नम: शिवाय।

मंत्र प्रभाव :

इस मंत्र का निरंतर जप करते रहने से चिंतामुक्त जीवन मिलता है। यह मंत्र जीवन में शांति और शीतलता प्रदान करता है। शिवलिंग पर जल व बिल्वपत्र चढ़ाते हुए यह शिव मंत्र बोलें व रुद्राक्ष की माला से जप भी करें। तीन शब्दों का यह मंत्र महामंत्र है।

चौथा मंत्र :

👉 संकटमोचन मंत्र : ॐ हं हनुमते नम:।

मंत्र प्रभाव :

यदि दिल में किसी भी प्रकार की घबराहट, डर या आशंका है तो निरंतर प्रतिदिन इस मंत्र का जप करें और फिर निश्चिंत हो जाएं। किसी भी कार्य की सफलता और विजयी होने के लिए इसका निरंतर जप करना चाहिए। यह मंत्र आत्मविश्वास बढ़ाता है।

हनुमानजी को सिंदूर, गुड़-चना चढ़ाकर इस मंत्र का नित्य स्मरण या जप सफलता व यश देने वाला माना गया है। यदि मृत्युतुल्य कष्ट हो रहा है, तो इस मंत्र का तुरंत ही जप करना चाहिए।

पांचवां मंत्र :

शांति, सुख और समृद्धि हेतु :

भगवान विष्णु के वैसे तो बहुत मंत्र हैं, लेकिन यहां कुछ प्रमुख प्रस्तुत हैं।

1. ॐ नमो नारायण। या श्रीमन नारायण नारायण हरि-हरि।

2. ॐ भूरिदा भूरि देहिनो, मा दभ्रं भूर्या भर। भूरि घेदिन्द्र दित्ससि।।

ॐ भूरिदा त्यसि श्रुत: पुरूत्रा शूर वृत्रहन्। आ नो भजस्व राधसि।।

3. ॐ नारायणाय विद्महे।

वासुदेवाय धीमहि।

तन्नो विष्णु प्रचोदयात्।।

4.

त्वमेव माता च पिता त्वमेव।

त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव।।

त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव।

त्वमेव सर्व मम देवदेव।।

5.

शांताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशम्।

विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्।।

लक्ष्मीकान्तंकमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यम्।

वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्।।

मंत्र प्रभाव :


भगवान विष्णु को जगतपालक माना जाता है। वे ही हम सभी के पालनहार हैं इसलिए पीले फूल व पीला वस्त्र चढ़ाकर उक्त किसी एक मंत्र से उनका स्मरण करते रहेंगे, तो जीवन में सकारात्मक विचारों और घटनाओं का विकास होकर जीवन खुशहाल बन जाएगा। विष्णु और लक्ष्मी की पूजा एवं प्रार्थना करते रहने से सुख और समृद्धि का विकास होता है।

छठा मंत्र :

मृत्यु पर विजय के लिए महामृंत्युजय मंत्र :


👉 ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिंपुष्टिवर्द्धनम्।

उर्वारुकमिव बन्धानान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।।

मंत्र प्रभाव :

शिव का महामृंत्युजय मंत्र मृत्यु व काल को टालने वाला माना जाता है इसलिए शिवलिंग पर दूध मिला जल, धतूरा चढ़ाकर यह मंत्र हर रोज बोलना संकटमोचक होता है। यदि आपके घर का कोई सदस्य अस्पताल में भर्ती है या बहुत ज्यादा बीमार है तो नियमपूर्वक इस मंत्र का सहारा लें। बस शर्त यह है कि इसे जपने वाले को शुद्ध और पवित्र रहना जरूरी है अन्यथा यह मंत्र अपना असर छोड़ देता है।

यह होता है तंत्र विद्या


    हिन्दू धर्म के साथ ही बौद्ध और जैन धर्म में भी इस विद्या का प्रचलन है। 
आओ जानते हैं कि तंत्र विद्या के कुछ रहस्य...


1. तंत्र में शरीर है महत्वपूर्ण : 
       साधारण अर्थ में कहा जाय तो तंत्र का अंर्थ तन से, मंत्र का अर्थ मन से और यंत्र का अर्थ किसी मशीन या वस्तु से होता है। तंत्र का एक दूसरा अर्थ होता है व्यवस्था। तंत्र मानता है कि हम शरीर में है यह एक वास्तविकता है। भौतिक शरीर ही हमारे सभी कार्यों का एक केंद्र है। अत: इस शरीर को हर तरह से तृप्त और स्वस्थ रखना अत्यंत जरूरी है। इस शरीर की क्षमता को बढ़ाना जरूरी है। इस शरीर से ही अध्यात्म को साधा जा सकता है। योग भी यही कहता है।


तांत्रिक मंत्र साधना

       आजकल प्रायः मारण,उच्चाटन, वशीकरण आदि के लिए अनेकों प्रकार की सिद्धियों आदि के लिए तंत्र क्रियाओं को किया जाता है।यह शास्त्र मुख्यरूप से शाक्तों का ही रूप है।प्रायः अर्थहीन होकर एकाक्षरी हुआ करता है।जैसे ऐं,ह्रीं, क्लीं, श्रीं,शूं इत्यादि।
तांत्रिक मंत्र वह है जिसका उपयोग पूजा (पूजा) में और समस्याओं को हल करने में मदद के लिए किया जाता है । तांत्रिक मंत्रों की एक विस्तृत श्रृंखला है, प्रत्येक को किसी विशेष समस्या को हल करने के लिए डिज़ाइन किया गया यह विशेष महत्व का योगविद्या है।इसे बहुत आसान नहीं कहा जा सकता है।बिना किसी विद्वान गुरु की उपस्थित में कभी किसी भी तंत्र को नहीं सीखना चाहिए।इस दौरान बहुत बड़े संकट में पड़ सकते हैं।जबकि मंत्र के जाप करने के लिए आप स्वयं भी एकाग्रचित्त होकर मंत्र जाप कर सकते हैं।


       जैसा कि हमने पहले भी बताया है कि मंत्र तीन प्रकार के होते हैं वैदिक मंत्र (सात्विक), तांत्रिक मंत्र और शाबर मंत्र. शाबर मंत्र से ज्ञान, मोक्ष ही नहीं बल्कि सांसारिक कार्य और सिद्धि प्राप्त की जा सकती है. शाबर मंत्र से तुरंत, विश्वसनीय, अच्छे और पूर्ण रूप से कार्य सिद्ध होते है.

साबर मंत्र


          भारत ही नहीं दुनियाभर में बहुत से लोग इस साबर मंत्र के नाम से अनभिज्ञ होते हैं।लेकिन जो इसके साधक हैं वे इसके बलबूते दुनियाँ को बदलने की ताकत रखते हैं।जैसे शंकर जी,हनुमानजी एवं इस कलयुग में बाबा गोरखनाथ जी ।
यह वह मंत्र होता है जो कि पारंपरिक योग भाषा संस्कृत से परे होती है।इसे किसी भाषा में लिखा व पढ़ा जा सकता है।या यूं कह लीजिये कि आम बोलचाल की गँवई भाषा में भी इसे सीखा तथा सिद्ध किया जा सकता है।


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