एक नशीहत नई पीढ़ी के लिए
नवयुवक एवं युवतियों के लिए एक नशीहत
एक युवक को नाबालिग से रेप के मामले में दोषी ठहराया गया था। हालांकि युवक का नाबालिग के साथ 'रोमांटिक अफेयर' था। कोर्ट ने कहा कि यह हर किशोरी का कर्तव्य/दायित्व है कि वह अपने शरीर की अखंडता के अधिकार की रक्षा करे।उसकी गरिमा और आत्मसम्मान की रक्षा करे। जेंडर संबंधी बाधाओं को पार कर अपने विकास के लिए प्रयास करें। कोर्ट ने कहा कि अपनी यौन इच्छाओं पर नियंत्रण रखना चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि हर किसी को अधिकार है कि वह अपने शरीर की स्वायत्तता और उसकी निजता के अधिकार की रक्षा करे। उसका हनन होने से बचे और बचाये।
महिलाओं का सम्मान
कोर्ट ने पुरुषों के लिए कहा कि किसी युवा लड़की या महिला का सम्मान करना एक किशोर पुरुष का कर्तव्य है और उसे अपने दिमाग को एक महिला, उसकी गरिमा, गोपनीयता का सम्मान करने के लिए प्रशिक्षित करना चाहिए।
कोर्ट ने कहा कि एक युवा लड़की या महिला का सम्मान करना एक किशोर पुरुष का कर्तव्य है और उसे एक महिला, उसके आत्मसम्मान, उसकी गरिमा का सम्मान करने के लिए अपने दिमाग को प्रशिक्षित करना चाहिए।
सेक्स एजुकेशन
सेक्स एजुकेशन पर कोर्ट ने कहा कि * cherrity begain's at home * 'चैरिटी बिगंस एट होम'। मतलब अच्छे काम की शुरुआत घर से होनी चाहिए। इसके लिए माता-पिता पहले शिक्षक होने चाहिए। इसलिए हमारा मानना है कि बच्चों, विशेषकर लड़कियों को बैड टच, बैड, बुरी संगति को पहचानने के लिए माता-पिता का मार्गदर्शन जरूरी है।
यहाँ तक तो ठीक है।लेकिन कोर्ट ने उस दोषी युवक को सजा नहीं सुनाई।सिर्फ नसीहत देते हुए उसे बरी कर दिया था। जबकि नीचली अदालत ने उस लड़के को रेप का आरोपी पाया था और उस नवयुवक ने एक नाबालिग लड़की के साथ अफेयर के चलते उसके साथ रेप किया था।
सभी अपराधियों को कोर्ट सजा नहीं देता
कोई जरूरी नहीं होता है कि कोर्ट हर मामले में आरोपी को सजा ही देगा। सबसे पहले तो थाने से ही लोग मामले को दबा देना चाहते हैं।अगर मामला वहां से रफादफा नहीं हो पाता है तो कोर्ट कचहरी में लम्बी लड़ाई चलती है।अनेकों प्रकार के उल्टेसुल्टे प्रश्नों की झड़ी लगाकर वकील साहब मामले को पेचीदा बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ते।अगर आरोपी पैसे वाला है तो वकील उसे बचाने का हर सम्भव प्रयास करते हैं।पीड़िता से ऐसे ऐसे गंदे सवाल किये जाते हैं कि लड़की शर्मिंदगी महसूस करते हुए मुँह ही न खोले।आरोप सिद्ध करने के लिए गवाह चाहिए होते हैं और कोई किसी के मामलों में पड़कर उलझना नहीं चाहता।जब गवाह ही नहीं रहेंगे तो सजा ही नहीं होगी।बलात्कार जैसी घटनाएं कहीं एकांत देखकर लोग करते हैं, जहाँ किसी की नजर न पड़े तो ऐसे में जब कोई देखा ही न हो,गवाही कैसे देगा।जब गवाही नहीं होगी तो सजा भी कोर्ट नहीं दे सकता।अगर किसी कोर्ट ने सजा दे भी दिया तो अगली कोर्ट में अपील किया जाता है और हो सकता है कि आरोपी वहां से बरी हो जाय।अक्सर हो भी जाते हैं।इसलिये जवानी की चौखट को छू रही उन तमाम बच्चियों को ऐसे दिल फेंक आशिक से दूर रहना चाहिए।उनके झूठे प्रेम जाल में न आयें। शादी के पहले किसी के साथ शारीरिक सम्बन्ध बनाने से बचें।
इज्ज़त जाने के बाद कभी लौटकर नहीं आती
रूपया पैसा, धन दौलत सब आता जाता रहता है।आज पैसा नहीं है, कल आ सकता है लेकिन जब इज्जत जहाँ से चली गई तो समझिये उसे वापस नहीं पाया जा सकता।इसलिए इज्ज़त वह धन है जो बहुत ही बढ़िया से बचाकर रखना चाहिए।उसे खो दिया तो सबकुछ खो दिया।
यौन इच्छाओं पर नियंत्रण
कलकत्ता हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान यह अहम टिप्पणी की।कोर्ट ने कहा कि किशोर लड़कियों को अपनी यौन इच्छाओं पर नियंत्रण रखना चाहिए।साथ ही कहा कि किशोर लड़कों को युवा लड़कियों और महिलाओं और उनकी गरिमा का सम्मान करना चाहिए।
आजकल का प्रेम एक दिखावा है।
अब सबसे अहम बात यह है कि आजकल के लड़के प्रेम का दिखावा करके लड़कियों को पहले अपने झूठे प्रेमजाल में फँसाते हैं।अगर लड़कियों की तरफ से उसको जरा सी भी ढील मिली यानी अगर लड़की विरोध करने में असमर्थता जताई, तो लड़कों को बल मिल जाता है।परिचय बढ़ाने लगते हैं।जैसे ही मेलजोल हुआ कि उँगली छोड़़ हाथ पकड़ लेते हैं।अब चूँकि किशोरावस्था की वह उन सीढ़ियों पर चढ़ रही होती हैं, जहाँ से यौवन अँगड़ाइयाँ भरने लगता है।विपरीत सेक्स के लिए एक विशेष आकर्षण बढ़ता जाता है।लड़के गलत तरीक़े से बार बार लड़कियों को छूने के लिए कोशिश करते हैं और यदि लड़कियाँ उसका विरोध नहीं करती हैं तो रेप होना निश्चित है।और यह प्रेम सिर्फ एक दिखावा होता है।असली खेल तो शारीरिक यौन इच्छाओं की पूर्ति करने के लिए रचा गया एक प्रपंच मात्र है।
किशोरावस्था में उभरती हुई जवानी की दहलीज पर कदम पड़ते ही वे बहकने लगतेहैं।इसे रोकना ,उन बहकते कदमों पर नियंत्रण पाना एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी होती है।सामान आपका है, हिफाजत भी आपको करनी है।अपनी आबरू को बचाकर रखना होगा।ऐश तो जीवन भर करना है।उसके लिए माँबाप हैं जो आपके लिए एक अच्छे से जीवनसाथी की तलाश में रहते हैं।आपसे ज्यादा उनके पास इस जीवन के अनुभव हैं।वे कभी नहीं चाहेंगे कि उनके बच्चे कुँवारे रहें या इधर उधर कहीं मूँह काला करते फिरें।
माता पिता की जिम्मेदारी
जैसे ही बच्चियाँ सयानी होती जाती हैं, उनके हावभाव बदलने लगते हैं।उनके चलने का ढंग बात करने का तरीका सब बदल जाता है।उनके पहनावे भी बदल जाते हैं। माता पिता की जिम्मेदारी बनती है कि वे अपने बच्चे बच्चियों के कपड़ों पर अवश्य ध्यान रखें।लड़कियों के वस्त्र इतने भड़कीले नहीं होने चाहिए कि जिधर से वे गुजरें, लोगों की नजरें बस उन्हें ही देखने लगें।इससे लड़कियों के लिए खतरा बढ़ जाता है।
लड़कियों की जिद
कुछ लड़कियाँ जीद्दी स्वभाव की होती हैं और वे इसे नहीं मानती हैं।और कुछ लोग उनका सपोर्ट भी करते हैं।यह पूरी तरह से गलत है।और इतना ही नहीं ऐसी ही लड़कियों के साथ ज्यादातर बलात्कार जैसी घटनाएं हो जाया करती हैं।
लड़कियों के पहनावे
लड़कियों के कपड़े भी उनकी अस्मत बचाने और लुटाने में उतने ही जिम्मेदार हैं जितने कि लड़के।कुछ लड़कियाँ ऐसे ऐसे कपड़ों में बाहर निकलती हैं कि देखने वालों की नजरें उनपर ही टिक जाती हैं।हटाये नहीं हटतीं।कुछ शोहदे, कुछ अय्याश नयी उमंग वाले बिगड़ैल मनबड़ तो पीछे भी लग जाते हैं और जैसे ही सुनसान जगह दिखी कि अस्मत पर डाका डाल देते हैं। अब यहाँ किसका दोष दिया जाय।सामान अगर सुंदर है तो बहुत से लोगों का मन मोह लेता है।ठीक वैसा ही होताहै, इन कपड़ों के मामले में भी।कुछ कपड़े बहुत ही अश्लीलता भरा प्रदर्शित करते हैं।और कपड़े तो अंगों को ढकने के लिए पहने जाते हैं।जिस वस्त्र को धारण करके भी अगर जिश्म दिखाई देता हो तो उसे क्या कहा जाय।
वे लोग जिधर हैं, सब लोग उधर देखते हैं।
हम तो देखने वालों की नजर देखते हैं।।
नजर ही वह समस्या है जो किसी की मुश्किलें खड़ी कर देती हैं।


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