सोमवार, 11 नवंबर 2024

श्री राम के भजन

खो गया हूँ कहीं,
इन अंधेरों में कहीं,
तेरे बिना, मैं हूँ अधूरा।

राहें थी रोशन कभी,
अब धुंधली हो गई,
तेरे बिना, मैं हूँ अधूरा।

तेरे वादों के सारे रंग,
अब लगे हैं फीके-से संग,
आंसू की बूँदों में डूबा हूँ।

तेरी यादों का हर पल,
बन गया है एक दर्द-सा छल,
तेरे बिना, मैं हूँ अधूरा।

(अंतराल संगीत)

दिल में तेरी बात है,
सांसों में तेरी याद है,
फिर भी तू, कहीं दूर-सा लगता है।

छूने को तुझे, मैं तरसा हूँ,
तेरे बिना, मैं तो बिखरा हूँ,
तेरे बिना, मैं हूँ अधूरा।

(अंतराल संगीत)

ख्वाबों में तू, हकीकत में नहीं,
मेरे हर दिन, तेरे बिना अधूरे हैं।

तेरे बिना ये जिन्दगी,
एक अधूरी कहानी है,
तेरे बिना, मैं हूँ अधूरा।

(अंतराल संगीत)

खो गया हूँ कहीं,
इन अंधेरों में कहीं,
तेरे बिना, मैं हूँ अधूरा।

तेरे बिना, मैं हूँ अधूरा।

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