आजमगढ़ के नामकरण की गाथा
आओ गाथा सुनलो
आजमगढ़ क्यों नाम पड़ा?
इतिहास है इसका सुनलो,
इतिहास है इसका सुनलो,
इतिहास है इसका सुनलो।।
मेहनगर को मुगल काल में मेहाँ सब लोग कहते थे
हरिवंश वहाँ पर राजा थे,सबलोग उनसे डरते थे
दिल्ली की सत्ता उसदम औरंगजेब के हाथ रही
ढूंढ ढूंढ कर हिंदू राजाओं को अपने बस में करता था
इस्लाम धर्म के प्रचार में खुद को आगे रखता था
फैजाबाद में फैजशाह था, औरंगजेब से पटती थी
फैजशाह के साले संग जुड़ा था सरायमीर
उसका मौसेरा भाई एक शहर किया आबाद
नाम निजामुद्दीन था, बस गया निजामाबाद।।
आजमगढ़ की छोटीसी गाथा को
आजसभीलोग मिल सुन लो
आजमगढ़ क्यों नाम पड़ा, इतिहास है इसका सुनलो।।
इतिहास है इसका सुनलो।
औरंगजेब के मातहतों से, जैसे ही ये पता चला।
मेहाँ में हैहिन्दू राजा, फैजशाह ने खबर दिया
औरंगजेब ने मेहाँ को जीतलेने का हुकुम दिया
हार गये सब मुस्लिम राजा, हरिवंश ने सबको पछाड़ दिया।
कुछ दिन बीता फिर एक दिन दिल्ली से,
एक सुन्दर स्त्री को मेहनगर में भेज दिया।
नामथा उसका नूरे एलबम
सुन्दरता से भरीहुई
चढ़ी जवानी नई उमर थी
हँसकर बोली हरिबंश से
मैं तहखाने तेरा देखूंगी
ऐसी मन में इच्छा लेके ही
मेहाँ में मैं आईहूँ।
चले अकेले दोनों नरनारी
तहखाने में पहुंच गए
लगी चिपकने राजा से तो
राजा भी मन में मगन हुए।
बोली वह मलिका निकाह पहले
तुमको मुझसे करना होगा
इस्लाम ही अबसे तुम्हारा भी
देखो यही धरम रहेगा।
अगर जिश्म की प्यास तुम्हें ,मेरे संग बुझानी है
कर दो एलान अभी महल में
इस्लाम ही सबका धर्म रहेगा।
राजा की जो पत्नी थीं, वो राजमहल से निकल गईं।
जंगल काटकर नगर बसाया रानी की सराय नामरखीं।
नूरेएलबम ने जुड़वाँ दो बच्चों को जनम दिया
आजमशाह और अजमतशाह उन दोनों का नाम रखा।
तमसा के तटपर आजमशाह ने अपना किला बनवाया
तालसलोना के एक किनारे पर अजमतशाह का आधिपत्य रहा।
आजमगढ़ और अजमतगढ़ की आज ये गाथा सुनलो
आजमगढ़ क्यों नाम पड़ा है
इतिहास को इसके सुनलो।।


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