मंगलवार, 19 नवंबर 2024

आजमगढ़ के नामकरण की गाथा

आजमगढ़ के नामकरण की गाथा

आजमगढ़ के नामकरण की

आओ गाथा सुनलो
आजमगढ़ क्यों नाम पड़ा?
इतिहास है इसका सुनलो,
इतिहास है इसका सुनलो,
इतिहास है इसका सुनलो।।

मेहनगर को मुगल काल में मेहाँ सब लोग कहते थे
हरिवंश वहाँ पर राजा थे,सबलोग उनसे डरते थे
दिल्ली की सत्ता उसदम औरंगजेब के हाथ रही
ढूंढ ढूंढ कर हिंदू राजाओं को अपने बस में करता था
इस्लाम धर्म के प्रचार में खुद को आगे रखता था
फैजाबाद में फैजशाह था, औरंगजेब से पटती थी
फैजशाह के साले संग जुड़ा था सरायमीर
उसका मौसेरा भाई  एक शहर किया आबाद
नाम निजामुद्दीन था, बस गया निजामाबाद।।
आजमगढ़ की छोटीसी गाथा को
आजसभीलोग मिल सुन लो
आजमगढ़ क्यों नाम पड़ा, इतिहास है इसका सुनलो।।
इतिहास है इसका सुनलो।





औरंगजेब के मातहतों से, जैसे ही ये पता चला।
मेहाँ में हैहिन्दू राजा, फैजशाह ने खबर दिया
औरंगजेब ने मेहाँ को जीतलेने का हुकुम दिया
हार गये सब मुस्लिम राजा, हरिवंश ने सबको पछाड़ दिया।
कुछ दिन बीता फिर एक दिन दिल्ली से,
एक सुन्दर स्त्री को मेहनगर में भेज दिया।
नामथा उसका नूरे एलबम
सुन्दरता से  भरीहुई
चढ़ी जवानी नई उमर थी
हँसकर बोली हरिबंश से
मैं तहखाने तेरा देखूंगी
ऐसी मन में इच्छा लेके ही
मेहाँ में मैं आईहूँ।

चले अकेले दोनों नरनारी
तहखाने में पहुंच गए
लगी चिपकने राजा से तो
राजा भी मन में मगन हुए।
बोली वह मलिका निकाह पहले
तुमको मुझसे करना होगा
इस्लाम ही अबसे तुम्हारा भी
देखो यही धरम रहेगा।
अगर जिश्म की प्यास तुम्हें ,मेरे संग बुझानी है
कर दो एलान अभी महल में
इस्लाम ही सबका धर्म रहेगा।

राजा की जो पत्नी थीं, वो राजमहल से निकल गईं।
जंगल काटकर नगर बसाया रानी की सराय नामरखीं।
नूरेएलबम ने जुड़वाँ दो बच्चों को जनम दिया
आजमशाह और अजमतशाह उन दोनों का नाम रखा।
तमसा के तटपर आजमशाह ने अपना किला बनवाया
तालसलोना के एक किनारे पर अजमतशाह का आधिपत्य रहा।
आजमगढ़ और अजमतगढ़ की आज ये गाथा सुनलो
आजमगढ़ क्यों नाम पड़ा है
इतिहास को इसके सुनलो।।

मंगलवार, 12 नवंबर 2024

प्यार का सागर

Verse 1:**
चाँदनी रातों में, तेरे संग बिताई
तारों की छांव में, तेरी यादें आई
तेरी हँसी में बसी, मेरी खुशियाँ सारी
तेरे बिना मैं कैसे, जियूं ये ज़िन्दगानी

**Chorus:**
तेरा साथ हो, हर लम्हा हो खास
तेरे बिना ये दिल, रहता है उदास
प्यार की बातें, तुझसे रोज़ करूं
तेरे बिना अब मैं, कैसे जी सकूं

**Verse 2:**
तेरी आँखों में है, प्यार का सागर
तेरे बिना जीवन, लगता है बंजर
तेरी बाहों में जो, सुकून मैंने पाया
उसी के बिना अब, कोई खुशी न आया

**Chorus:**
तेरा साथ हो, हर लम्हा हो खास
तेरे बिना ये दिल, रहता है उदास
प्यार की बातें, तुझसे रोज़ करूं
तेरे बिना अब मैं, कैसे जी सकूं

**Bridge:**
तू ही है मेरा, पहला और आखिरी प्यार
तेरे बिना दुनिया, लगती है बेकार
तेरी मुस्कान में, है जन्नत का नज़ारा
तेरे बिना जीवन, है सूना सूना सारा

**Chorus:**
तेरा साथ हो, हर लम्हा हो खास
तेरे बिना ये दिल, रहता है उदास
प्यार की बातें, तुझसे रोज़ करूं
तेरे बिना अब मैं, कैसे जी सकूं

**Outro:**
चाँदनी रातों में, तेरे संग बिताई
तारों की छांव में, तेरी यादें आई
तेरी हँसी में बसी, मेरी खुशियाँ सारी
तेरे बिना मैं कैसे, जियूं ये ज़िन्दगानी

सोमवार, 11 नवंबर 2024

प्यार का इजहार

खो गया हूँ कहीं,
इन अंधेरों में कहीं,
तेरे बिना, मैं हूँ अधूरा।

राहें थी रोशन कभी,
अब धुंधली हो गई,
तेरे बिना, मैं हूँ अधूरा।

तेरे वादों के सारे रंग,
अब लगे हैं फीके-से संग,
आंसू की बूँदों में डूबा हूँ।

तेरी यादों का हर पल,
बन गया है एक दर्द-सा छल,
तेरे बिना, मैं हूँ अधूरा।

(अंतराल संगीत)

दिल में तेरी बात है,
सांसों में तेरी याद है,
फिर भी तू, कहीं दूर-सा लगता है।

छूने को तुझे, मैं तरसा हूँ,
तेरे बिना, मैं तो बिखरा हूँ,
तेरे बिना, मैं हूँ अधूरा।

(अंतराल संगीत)

ख्वाबों में तू, हकीकत में नहीं,
मेरे हर दिन, तेरे बिना अधूरे हैं।

तेरे बिना ये जिन्दगी,
एक अधूरी कहानी है,
तेरे बिना, मैं हूँ अधूरा।

(अंतराल संगीत)

खो गया हूँ कहीं,
इन अंधेरों में कहीं,
तेरे बिना, मैं हूँ अधूरा।

तेरे बिना, मैं हूँ अधूरा।

श्री शिव की बंदना

खो गया हूँ कहीं,
इन अंधेरों में कहीं,
तेरे बिना, मैं हूँ अधूरा।

राहें थी रोशन कभी,
अब धुंधली हो गई,
तेरे बिना, मैं हूँ अधूरा।

तेरे वादों के सारे रंग,
अब लगे हैं फीके-से संग,
आंसू की बूँदों में डूबा हूँ।

तेरी यादों का हर पल,
बन गया है एक दर्द-सा छल,
तेरे बिना, मैं हूँ अधूरा।

(अंतराल संगीत)

दिल में तेरी बात है,
सांसों में तेरी याद है,
फिर भी तू, कहीं दूर-सा लगता है।

छूने को तुझे, मैं तरसा हूँ,
तेरे बिना, मैं तो बिखरा हूँ,
तेरे बिना, मैं हूँ अधूरा।

(अंतराल संगीत)

ख्वाबों में तू, हकीकत में नहीं,
मेरे हर दिन, तेरे बिना अधूरे हैं।

तेरे बिना ये जिन्दगी,
एक अधूरी कहानी है,
तेरे बिना, मैं हूँ अधूरा।

(अंतराल संगीत)

खो गया हूँ कहीं,
इन अंधेरों में कहीं,
तेरे बिना, मैं हूँ अधूरा।

तेरे बिना, मैं हूँ अधूरा।

श्री राम के भजन

खो गया हूँ कहीं,
इन अंधेरों में कहीं,
तेरे बिना, मैं हूँ अधूरा।

राहें थी रोशन कभी,
अब धुंधली हो गई,
तेरे बिना, मैं हूँ अधूरा।

तेरे वादों के सारे रंग,
अब लगे हैं फीके-से संग,
आंसू की बूँदों में डूबा हूँ।

तेरी यादों का हर पल,
बन गया है एक दर्द-सा छल,
तेरे बिना, मैं हूँ अधूरा।

(अंतराल संगीत)

दिल में तेरी बात है,
सांसों में तेरी याद है,
फिर भी तू, कहीं दूर-सा लगता है।

छूने को तुझे, मैं तरसा हूँ,
तेरे बिना, मैं तो बिखरा हूँ,
तेरे बिना, मैं हूँ अधूरा।

(अंतराल संगीत)

ख्वाबों में तू, हकीकत में नहीं,
मेरे हर दिन, तेरे बिना अधूरे हैं।

तेरे बिना ये जिन्दगी,
एक अधूरी कहानी है,
तेरे बिना, मैं हूँ अधूरा।

(अंतराल संगीत)

खो गया हूँ कहीं,
इन अंधेरों में कहीं,
तेरे बिना, मैं हूँ अधूरा।

तेरे बिना, मैं हूँ अधूरा।

तेरे बिना मैं अधूरा हूँ

खो गया हूँ कहीं,
इन अंधेरों में कहीं,
तेरे बिना, मैं हूँ अधूरा।

राहें थी रोशन कभी,
अब धुंधली हो गई,
तेरे बिना, मैं हूँ अधूरा।

तेरे वादों के सारे रंग,
अब लगे हैं फीके-से संग,
आंसू की बूँदों में डूबा हूँ।

तेरी यादों का हर पल,
बन गया है एक दर्द-सा छल,
तेरे बिना, मैं हूँ अधूरा।

(अंतराल संगीत)

दिल में तेरी बात है,
सांसों में तेरी याद है,
फिर भी तू, कहीं दूर-सा लगता है।

छूने को तुझे, मैं तरसा हूँ,
तेरे बिना, मैं तो बिखरा हूँ,
तेरे बिना, मैं हूँ अधूरा।

(अंतराल संगीत)

ख्वाबों में तू, हकीकत में नहीं,
मेरे हर दिन, तेरे बिना अधूरे हैं।

तेरे बिना ये जिन्दगी,
एक अधूरी कहानी है,
तेरे बिना, मैं हूँ अधूरा।

(अंतराल संगीत)

खो गया हूँ कहीं,
इन अंधेरों में कहीं,
तेरे बिना, मैं हूँ अधूरा।

तेरे बिना, मैं हूँ अधूरा।

तन्हाई

खो गया हूँ कहीं,
इन अंधेरों में कहीं,
तेरे बिना, मैं हूँ अधूरा।

राहें थी रोशन कभी,
अब धुंधली हो गई,
तेरे बिना, मैं हूँ अधूरा।

तेरे वादों के सारे रंग,
अब लगे हैं फीके-से संग,
आंसू की बूँदों में डूबा हूँ।

तेरी यादों का हर पल,
बन गया है एक दर्द-सा छल,
तेरे बिना, मैं हूँ अधूरा।

(अंतराल संगीत)

दिल में तेरी बात है,
सांसों में तेरी याद है,
फिर भी तू, कहीं दूर-सा लगता है।

छूने को तुझे, मैं तरसा हूँ,
तेरे बिना, मैं तो बिखरा हूँ,
तेरे बिना, मैं हूँ अधूरा।

(अंतराल संगीत)

ख्वाबों में तू, हकीकत में नहीं,
मेरे हर दिन, तेरे बिना अधूरे हैं।

तेरे बिना ये जिन्दगी,
एक अधूरी कहानी है,
तेरे बिना, मैं हूँ अधूरा।

(अंतराल संगीत)

खो गया हूँ कहीं,
इन अंधेरों में कहीं,
तेरे बिना, मैं हूँ अधूरा।

तेरे बिना, मैं हूँ अधूरा।

मेरे ख्वाब

मेरे ख्वाबों में कोई रोज आती है
मुझे नींदों से खुद वो जगाती है।
लगता है पहचान पुरानी हैउससे
मैं जागूँ तो कहीं दूर चलीजाती है मुझसे।
मेरे ख्वाबों की मलिका कोई हैअगर
मुझे दिन में नजर क्यों न आती है।।


मैंने दिन में कभी, ना कहीं पर उसे
अपने ख्वाबों से आगे या पीछे कहीं
देखा नहीं है अभी तक मगर ऐसा लगता है -
दिल के करीब मेरे रहती है हरदम।।
परियों की रानी है बेशक मगर
मुझसे मिलकर कहाँ चली जाती है।।


मेरी निगाहें तुम्हें ढूढ़ती हैं
चेहरा तुम्हारा खूब पहचानती हैं
आँखों से ओंझल होजाती हो क्यों तुम
आखिर सपनों में किसलिए आती हो हरदम
देखो मुझे अब ना और तड़पाओ
कभी मुझे अपना पता तो बता दो,
पता तो बता दो ,पता तो बता दो।।




ऐ मेरे सनम, कहीं दूर चलें हम,
जहाँ सिर्फ तुम हो, और मैं रहूँ।
हम दोनों और ये हसीं वादियाँ हों।
और कोई आता जाता नहीं हो।।


ये दुनियां के शोरशराबे
सुनकर जी घबराता है।
एकांत में कुछ पल जी लेने से
मन हल्का हो जाता है।
नदियों का कलरव
चिड़ियों की चहक
फूलों की खुशबू आती हो
ऐसी कोई जगह बता दो
जो दिल में बस जाती हो।
तेरे गेसुओं की घनी छाँव में अब
कुछ पल बिताने की चाहत हमारी है
तेरे झील से दोनों नयना ये प्यारे से
उसी में डूब जाने को जी चाहता है।।
ये होठों की लाली मदहोश मुझे करती हैं
मयखाने की मदिरा  का जाम तुम जो लगती हो।






तुम छुपके छुपाके आती हो
आकर प्यार दिखाती हो
बचकर दुनियाँ की नजरों से
कौन सा रिश्ता जताती हो।
बोलो बोलो क्या कहती हो.....हो हो हो..

तुम छुपके छुपाके आती हो..
आकर प्यार दिखाती हो  
हो हो हो...हो हो हो

बड़े बेमुरव्वत वाले हैं जमाने वाले,
उन्हें इस तरह तेरामेरा मिलना गवारा नहीं है
जमाने की नजरों से कबतक छुपेंगे
छुपाने से मुहब्बत कभी छुपती नहीं है
तुमछुपके छुपाके आती हो
आकर प्यार दिखाती हो....


ये दिलमेरा अब तुम्हारा रहेगा
कहदो ये जिन्दगी भी तेरे नाम कर दूँ
दो दिल मिलकर एक जान रहेंगे
एक दूजे बिन बेजान रहेंगे
यही है फसाना हमारा तुम्हारा
बहुत देर तक अब बचना नहीं है
मुश्किलों से निपटना भारी पड़ा है।
कोई तेरे दामन पे ऊंगली उठादे
क्यों न अभी से पर्दा उठा दें।


मेरे आँखों में ख्वाब तुम्हारे

मेरे आँखों में ख्वाबों तुम्हारे हैं
--------------------------------------

मेरे ख्वाबों में कोई राज आती है
मुझे नींदों से खुद वो जगाती है।
लगता है पहचान पुरानी हैउससे
मैं जागूँ तो कहीं दूर चलीजाती है मुझसे।
मेरे ख्वाबों की मलिका कोई हैअगर
मुझे दिन में नजर क्यों न आती है।।


मैंने दिन में कभी, ना कहीं पर उसे
अपने ख्वाबों से आगे या पीछे कहीं
देखा नहीं है अभी तक मगर ऐसा लगता है -
दिल के करीब मेरे रहती है हरदम।।
परियों की रानी है बेशक मगर
मुझसे मिलकर कहाँ चली जाती है।।


मेरी निगाहें तुम्हें ढूढ़ती हैं
चेहरा तुम्हारा खूब पहचानती हैं
आँखों से ओंझल होजाती हो क्यों तुम
आखिर सपनों में किसलिए आती हो हरदम
देखो मुझे अब ना और तड़पाओ
कभी मुझे अपना पता तो बता दो,
पता तो बता दो ,पता तो बता दो।।




ऐ मेरे सनम, कहीं दूर चलें हम,
जहाँ सिर्फ तुम हो, और मैं रहूँ।
हम दोनों और ये हसीं वादियाँ हों।
और कोई आता जाता नहीं हो।।


ये दुनियां के शोरशराबे
सुनकर जी घबराता है।
एकांत में कुछ पल जी लेने से
मन हल्का हो जाता है।
नदियों का कलरव
चिड़ियों की चहक
फूलों की खुशबू आती हो
ऐसी कोई जगह बता दो
जो दिल में बस जाती हो।
तेरे गेसुओं की घनी छाँव में अब
कुछ पल बिताने की चाहत हमारी है
तेरे झील से दोनों नयना ये प्यारे से
उसी में डूब जाने को जी चाहता है।।
ये होठों की लाली मदहोश मुझे करती हैं
मयखाने की मदिरा  का जाम तुम जो लगती हो।






तुम छुपके छुपाके आती हो
आकर प्यार दिखाती हो
बचकर दुनियाँ की नजरों से
कौन सा रिश्ता जताती हो।
बोलो बोलो क्या कहती हो.....हो हो हो..

तुम छुपके छुपाके आती हो..
आकर प्यार दिखाती हो  
हो हो हो...हो हो हो

बड़े बेमुरव्वत वाले हैं जमाने वाले,
उन्हें इस तरह तेरामेरा मिलना गवारा नहीं है
जमाने की नजरों से कबतक छुपेंगे
छुपाने से मुहब्बत कभी छुपती नहीं है
तुमछुपके छुपाके आती हो
आकर प्यार दिखाती हो....


ये दिलमेरा अब तुम्हारा रहेगा
कहदो ये जिन्दगी भी तेरे नाम कर दूँ
दो दिल मिलकर एक जान रहेंगे
एक दूजे बिन बेजान रहेंगे
यही है फसाना हमारा तुम्हारा
बहुत देर तक अब बचना नहीं है
मुश्किलों से निपटना भारी पड़ा है।
कोई तेरे दामन पे ऊंगली उठादे
क्यों न अभी से पर्दा उठा दें।


शुक्रवार, 8 नवंबर 2024

जौ गोजई के हथुई रोटी


गाँव-शहर आ नगर दिहात में
टोला मोहल्ला सगरी भयवा
एक्कै बात सुनात बाय
आज बहुत मँहगाई बढ़िगै
सब्जी महगँ बिकात बाय।
डीजल पेट्रोल सब मँहगा होइगा
दारू खूब छनात बा
नेता नगारी सबके मुँह से
सरकारै के दोस दियात बा।
अब हमरे समझ में ई ना आवत,
कइसन ई मँहगाई बा?
मुरगा,मछरी, बकरा, बकरी के
का सस्ता माँस बिकात बा?
खरीदारन के भीड़ उहाँ खूब,
लागत अपरम्पार बा।
का ऊहै सस्ता बीक रहल बा
जनता तरै उप्पर भहरात बा।।


दारू के ठीका पर देखलीं
लोग पी-पीके ढमिलात रहें।
पाँच रुपया के नमकीन लेके
शीशी के दारू छनात रहे
एतनी मँहगाई पर ई हाल  बाटे
नेकुरा ले दारू छकात हवे।

साँच बात त इहै भइया ,
मँहगाई ना अबहीं बाय ना तब्बै रहे।
जेकरा लगे खूब पइसा बाटे
ऊ का बूझै मँहगाई के
जेकरा लगे ना फूटही कौड़ी
ईओकरा खातिर मँहगाई हवे।

सौ रुपिया में पहिले , बिगहन खेत बिकात रहे
ना पइसा  जुर पावै  केहू के,बहुतै मँहगा बुझात रहे।
आज पचास लाख के बिस्वा भी
देखबा लेवे वाले तइयार हवैं।

मँहगाई हौ त घर घरे में
बड़की मोबाइल देखात हवे।
एक मोबाइल से के बतियाई
सबके अलगे अलगे किनात हवे।।

दस हजार से कवनों क दाम कम नइखे,
चार छ गो हर घरही में देखात हवै।
बेटवा के शादी तय होतकहा,
बड़की मोबाइल चोरी से किनात हवै,
बजार हटिया के बहाने,
होवै वाली दुलहिन के लगे
शादी से पहिले चल जात हवे।।
रातरात भर फुसुर खूब हालचाल लियात हवै।
वाटसाप पर आनलाइन हरदम  प्यार के इजहार होखे
रिचार्ज खतम भइला से पहिले
बिना पुछले डाटा रोज भरात हवै।।


कान खोल के सुनला सभे
इहै न मँहगाई बाय
तेल भरावे के बेंवत नइखे
दहेज में मोटरसइकिल मँगात हवे।।

जेकरे घर में सरकारी नौकरी बा
पइसा के ओकरे खरिहान हवै
उम्मीद से ज्यादा तनख्वाह मिलत हौ
फिर भी मुँह पर अंन्हियार लगे।
एहरवोहर से खुब लूटतो बा लोग
तउने प ओतनै उहे लोग रोवतो बाय
घूमघूमके ढेर उहै लोग
सगरी ओर बतियवतो बाय।
बड़ी मँहगाई ई सरकार लेआइल
एहमें लूटमार अपार हवै।।
आटा दाल सब मँहगा हो गइल
तरकारी मँहगँ बिकात हवे।।
सुनत सुनत कान पक गइल
त कवि मालचन्द ई कविता लिखलैं
जेके जेतने मालिक दिहले बाड़न ,
ऊ ओतनै में परशान हवे।।

बजड़ी,टाँगुन,मड़ुआ, लतरी
पहिले इहै सबके बोआत रहै।
तिल्ली, तीसी,लाही चउमुख
खेते में लहलहात रहै।।
जौ- गोजई के हथुई रोटी
देखतै मन खिझियात रहै।।
नेनुआ, लौकी,कोहड़ा ,सरपुतिया,
छानी पर  चढ़ जात रहै।।
होत सबरे लेहसुन मिरचा
सिल्ही पर सबके कुटात रहै।

तब दु चार आना में सवासेर
देशी घीव बिकात रहै।।
बुद्धू कहलैं झिंगुरल्ली से
कब्बो ना पेट भरात रहे।।

बेशक पेट भरत ना रहे
फिर भी जान अपार रहै।
चटनी रोटी खातखात,
हगतो के गाँड़ भभात रहै।।

🔻वीडियो शामिल है👎
 https://youtu.be/xksY_o4RAmA?si=hinM0N7kMoIXboM-

कबोकबो त एइसन होखे
लोगभूखे पेट सो जात रहै।
अधपेटवा खाके सगर दिन
कूवाँ से पानी दुहात रहै।।
सरसों के साग,मड़ुआ के रोटी,
अधपेटवै सब खात रहे।
बजर के जाँगर देत रहैं मालिक
सबलोग मेहनती देखात रहैं।।
दस बरीस गड़खुल्लै घुमैं
भगई तब किनात रहै।।
करैं मजूरी मेहरारु सब
तब घरमें सबकर मान रहै।
गा-गा के जाँता रोज पीसैं
तब जाके रोटी मिलत रहै।
कूटैं, पीसै, पकवै ,धौवैं
दिनभर गदही नीयन खटत रहैं।
दर्जन भर लइका जन्मावत रहलीं
कबहुँ ना अस्पताल में जात रहैं।।
सात सोति के दूध पियाके
बेटवा के पहलवान कर देत रहैं।।
डब्बा के दूध तब्बो रहे लेकिन
ऊ ना कहलीं कब्बो मरदे से,
लइका के आपन दूध पियाइब ना।
तोहार कमाई उफ्फर परै
आपन देंह गँवाब ना।।
झिन्नीमुट क लइका लेके
खाना हम बनाइब ना।
रोइरोयके भोजन बनवेलीं
चुल्हा हमसे फुँकाई ना।।

टमठ टमठ के आगी तब बरै।।
गैस सिलेंडर तब रहै ना
धूवाँ आँखिन में एतना लागै
फिर भी चूल्ही के ना जरै आग।
बड़ी तपस्या से भोजन बनवैं
तब जाके पेट के बूझै आग।।
  

तब मँहगाई ना रहै बस
एतना रुपिया पइसा ना रहे।
तब सोना चाँनी अपार रहे
हँसुली,गुजहा,काड़ा, छाड़ा
बाजूबंद, करधनी, नकबुल्ला
चारचार लर के हार होखे।
ना रहै बेलाउज आधा पेट के
जवना से देंह उघार लगे।
एक हाथ के घूँघट काढ़ैं
मर्यादा के  बहुतै लाज रहै।।
बिजली के अँजोर तब ना रहै
दिया बाती से काम चलै
रात अँजोरिया आवै त
सबके अँगना उँजियार लगे।।
खटपटी,खड़ाऊँ, टायर के चप्पल
एही से सबकर काम चलै
मँगनी के कुर्ता धोती से
केहूकेहू के बियाह होखे।
मँहगाई तब ना रहे बस
पइसा के खाली अभाव रहे।
पइसा के खाली अभाव रहे।।
अरे मालचन्द समय बदल गै
पहिले जब कोड़हारा चले
महिया खाय सब भड़रो होखे
जगह जगह खरिहान होखे।।।