दहेज के लालच और रिश्ते
दहेज का लालच और रिश्ते
मेरा मानना है कि घर-परिवार और लडका अच्छा देखें लेकिन ज्यादा के चक्कर में अच्छे रिश्ते हाथ से नहीं जाने दें।
सुखी वैवाहिक जीवन जियें।
30 की उम्र के बाद विवाह नहीं होता वह तो एक समझौता होता है।सही उमर तो 18 से 20 साल ही बेटियों के ब्याह के लिए उचित समय है।बड़े घरों में पैदा होने वाली बेटियाँ मन ही मन कूढ़ती रहती हैं।क्योंकि बड़ेबड़े घरों में लोगों को अपने बिजनेस के सिवा कुछ दिखाई देता ही नहीं।अब ऐसे में अगर मौक मिला कि उनके कदम बहक जाते हैं।
एक समय था जब खानदान देख कर रिश्ते होते थे। वो लम्बे भी निभते थे | समधी-समधन में मान मनुहार थी। सुख-दु:ख में सबका साथ था। रिश्ते-नाते की अहमियत का अहसास था।
चाहे धन-माया कम थी मगर खुशियाँ घर-आँगन में झलकती थी। कभी कोई ऊँची-नीची बात हो जाती थी तो आपस में बड़े-बुजुर्ग संभाल लेते थे। तलाक शब्द रिश्तों में था ही नहीं | दाम्पत्य जीवन खट्टे-मीठे अनुभव में बीत जाया करता था। दोनों एक-दूसरे के बुढ़ापे की लाठी बनते थे और पोते-पोतियों में संस्कारों के बीज भरते थे। अब कहां हैं वो संस्कार? आँख की शर्म तो इतिहास हो गई। नौबत आ जाती है रिश्तों में समझौता करने की।
लड़का-लड़की अपने समाज के नही होंगे तो भी चलेगा, ऐसी बातें भी सामने आ रही हैं।बिना विवाह के रिलेशनशिप नाम का एक नयारिश्ता देखने को मिल रहा है।ऐसे में दो जवान लड़के लड़कियाँ एक साथ एक कमरे में रातें बिता रहे हैं।क्या यही समाज है?ऐसा क्यों हो रहा है?क्योंकि समय से लड़कियों का विवाह उनके माता पिता या परिवार के लोग नहीं कर सके।कुछ दिन रिलेशनशिप में बिताने के बाद जब मन भर जाता है तो लड़के शादी से कन्नी काट लेते हैं और लड़कियां रेप का केस जड़ देती हैं।कि फलां ने शादी का झाँसा देकर उसके साथ शारीरिक सम्बंध बनाया था।तो ऐसी नौबत आती ही क्यों है?कौन है जिम्मेदार?मानते हैं कि पैसा होना बहुत जरूरी है लेकिन क्या ईमान बेचकर,अपना जमीर बेचकर।अपनी आवश्यकता को कम भी तो किया जा सकता है।दस मंजिल का मकान न सही एक मंजिल में रहा जा सकता है।
साईं उतना दीजिये, जामें कुटुम समाय।
मैं भी भूखा ना रहूँ, साधु न भूखा जाय।।
ऐसे खयाल रखें तो जीवन कोई बुरा नहीं कटेगा।आज समाज की लडकियाँ और लड़के खुले आम दूसरी जाति की तरफ जा रहे हैं और दोष दे रहे हैं कि समाज में अच्छे लड़के या लड़कियाँ मेरे लायक नहीं हैं। कारण लडकियाँ आधुनिकता की पराकाष्ठा पार कर गई है। जब ये लड़के-लड़कियाँ मन से मैरिज करते हैं तब ये कुंडली मिलान का क्या होता है ? तब तो कुंडली की कोई बात नहीं होती | यही माँ बाप सब कुछ मान लेते हैं। तब कोई कुण्डली, स्टेटस, पैसा, इनकम बीच में कुछ भी नहीं आता।
अगर अभी भी माँ-बाप नहीं जागेंगे तो स्थितियाँ और विस्फोटक हो जाएंगी। समाज के लोगों को समझना होगा कि लड़कियों की शादी 22-23-24 साल की होते होते में हो जाये और लड़का 25-26 का हो,बस । सब में सब गुण नहीं मिलते।"घर, गाड़ी, बंगला से पहले व्यवहार तोलो। माँ बाप भी आर्थिक चकाचोंध में बह रहे है । पैसे की भागम-भाग में मीलों पीछे छूट गए हैं, रिश्ते-नातेदार।
टूट रहे हैं घर परिवार | सूख रहा है प्रेम और प्यार।
रिश्ते तो फिर भी मिल जायेंगे लेकिन कितने निभते हैं और कितने निभाने पड़ते हैं।पैसे वाले लोग किसी गरीब को अपना रिश्तेदार क्यों नहीं बनाते, सोचा है कभी किसी ने।स्टेटस खराब हो जाता है।ऐसा सोच रखते हैं लोग।ये नहीं सोचते कि चलो हमें भगवान ने बहुत धनदौलत दे दिया है तो चलो किसी गरीब घर बेटी को बहू बना लायें ताकि एक गरीब बाप को थोड़ा मदद मिल जायेगी।



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