क्या राजनीति के लिए गठबंधन का नाम देश के नाम से जोड़ना अनुचित नहीं लगता
देश के नाम को बदनाम करने की साजिश के तहत महागठबंधन का नाम I.N.D.I.A. रखा गया लगता है।
भारत की छवि को धूमिल करने और विदेशों में मोदीजी की लोकप्रियता को भंग करने के उद्देश्य से विरोधियों द्वारा कुछ माह पहले एक गठबंधन बनाया गया।इस गठजोड़ में वे तमाम पार्टियों के लोग चाहे वे उत्तर प्रदेश से हों,बिहार के हों,छत्तीसगढ़ के हों,राजस्थान, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना आंध्रप्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक आदि सहित सभी विपक्षी दल एक जुट होकर एक मंच साझा किया था।जिसमें सभी दलों ने भाजपा के चर्चित चेहरे को अपना लक्ष्य बनाया था।उनकी बस एक ही बात थी कि किसी भी तरह से भाजपा को सत्ता से बाहर निकाल फेका जाय।जबतक मोदीजी सत्ता की कुर्सी पर आसीन रहेंगे, किसी भी दल की राजनीति नहीं चल सकती।इसलिए सभी एक जुट होकर एक मंच पर आइये और संकल्प लिया जाय।
लेकिन बात यहीं खत्म नहीं नहीं हुई सभी दलों के मुखिया लोग अपने अपने जुगाड़ में मस्त थे।और सभी लोग खुद कोअगला प्रधानमंत्री का चेहरा मानते हुए इस गठबंधन में शामिल हुए थे।
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यहाँ पर लोगों ने एक भूल कर दिया उस मीटिंग में यह तय नहीं कर पाये कि यह गठबंधन जिसका नाम इंडिया रखा जा रहा है तो किसे प्रधानमंत्री पद का असली चेहरा बनाया जाय जिसे मोदी के बाद लोग पसंद करेंगे।यही कमी रह थी और यह सम्भव ही नहीं था कि वे अपने सिवा किसी और के सिर पर प्रधानमंत्री का मुकुट पहने बरदाश्त करते।इसलिये सिर्फ सभी दलों ने मिलकर जो गठबंधन बनाया और जिसका नाम भी ऐसा रखा जिस हर वह मतदाता या नागरिक जो राजनीति के गलियारों से दूरी बनाकर सिर्फ अपने काम से मतलब रखता है और चुनाव के दौरान अपने मतदान उसे करता है जो भारत को एक नई दिशा देना चाहता है।यहाँ सबको पता था कि आखिर यह गठबंधन कहाँ तक जायेगा, क्योंकि जब इन लोगों में खुद आपसी सहमति नहीं बन रही है।प्रधानमंत्री बनने का सपना देखने वालों में यूपी के सपा नेता, बहुजन के मुखिया, बिहार के नितीश जी,बंगाल की दीदी के साथ साथ तमाम बड़े चेहरे खुद को प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठते हुए देखना चाहते हैं।लेकिन दुर्भाग्य से उनकी मुख्यमंत्री वाली कुर्सी भी हाथ से खिसकती जा रही है।
एक दूजे की टाँग खींचने के चक्कर में लोग विकास की राह में रोड़ा बनते जा रहे हैं।जनता को भी अपना हित और अनहित सब समझ में आता है।लेकिन नेतागण सभी जनमानस को सिर्फ और सिर्फ मुर्ख समझती रही हैं।आज जब लोगों ने अपने क्षेत्र के विकास की गति को देखा तो उन्हें यह बात समझने में जरा भी देरी नहीं लगी देश का हित कहाँ है।
यहाँ यह जान लेना भी जरूरी है कि क्या भाजपा में सभी लोग बहुत अच्छे और दूध के धुले हुए हैं तो उसका भी जवाब है कि नहीं।क्योंकि भाजपा भी कुछ बाहरी गंदे लोगों को अपने दल में जगह देकर कुछ गंदगी उसने भी बटोर रखी है लेकिन यह भी उसकी कहीं न कहीं मजबूरी रही होगी।क्योंकि बड़े दलों को तोड़ने के लिए उसके जिताऊ नेताओं को अपने साथ लाकर उस दल को कमजोर करना था और खुद को मजबूत बनाना था।वेकुछ ऐसे नेता हैं, जो चाहे जिस किसी भी दल को पकड़ लेंगे जीत पक्की तो ऐसे लोगों को मिलाकर अपनी पकड़ को मजबूत हर दल करता है।लेकिन कुछ बहुत पुराने कार्यकर्ता जो शुरू से आखिर तक भाजपा के साथ खड़े रहे।नारे लगाते रहे, प्रचार प्रसार करते रहे, उनसे ज्यादा बाहर से आये मेहमान नेताओं को सम्मान देते हुए उन्हें मैदान में उतारना मुनासिब तो नहीं होता।लेकिन जहाँ हार जीत की बात होती है तो वह बात भुलाकर उसे उतारा जाता है जिसे जीतने के अवसर अधिक लगते हैं।इसलिए अब जो सेवक सदा से ही पार्टी की सेवा में लगे रहते हैं उन्हें तो दिक्कत होती ही है।खबर है इस विधानसभा चुनाव में कोई एक दो नहीं पूरे नौ मंत्रियों ने अपनी सीटें नहीं बचा पायी।तो उन्हें समझना चाहिए कि आखिर ऐसा क्यों हुआ।आपसे गलती कहाँ हुई थी।
लिखने का तात्पर्य यह है कि यह प्रजा तंत्र है और जनता अपना शासक खुद चुनती है।इसलिए किसी पद को पाकर पूरी निष्ठा और इमानदारी से अपने पद का सही उपयोग करना चाहिए।क्योंकि जब जनता आपको अपनी आँखों में बसाकर अपने दिल में बिठाया है तो उसकी भी कुछ उम्मीदें हैं आपसे।यह जरूरी नहीं कि आप किसी को कोई व्यक्तिगत सुविधा उपलब्ध नहीं कराया लेकिन सामूहिकता के दायरे में रहते हुए सारी सरकारी योजनाओं का लाभ आप सभी के लिए उतारें।जब मंत्री, मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री देश की जनता के साथ भेदभाव करने लगेंगे तो जनता भी उन्हें दिल से नकार देगी और उसके लिए उसके पास अपने मतों का अधिकार मिला हुआ है।जब जनता बिना किसी भेदभाव के अपना फैसला खुद करेगी तो अच्छी सरकार मिलेगी।लेकिन जब जातिवाद, पूंजीवाद, पार्टीवाद लेकर चलेगी तो न कभी अच्छे लोग चुनाव जीतेंगे और ही कभी अच्छी सरकार बनेगी।जबभी मतदान का समय आता है तो खुलकर बिना किसी दबाव या भय के सभी को अपना मतदान अवश्य करना चाहिए।आपके एक वोट की ताकत सत्ता बदल सकती है और सत्ता बचा सकती है।इसलिए जागरूक होइये।मतदान खुद की समझदारी से करने की जरूरत है।
लेबल: गठबंधन, चुनावी गठजोड़, महागठबंधन, महाचाल, I.N.D.I.A.

