भगवान श्रीरामजन्मभूमि पावन धाम अयोध्या
भगवान श्री रामजन्मभूमि की पावनधाम अयोध्या
अयोध्या में आज हर कोई भगवान श्री राम के भव्य राम मंदिर बनने की खुशियां मना रहा है।इस अयोध्या धाम में प्रभुश्रीराम के जन्मभूमि पर मंदिर बनने तक की जो भी दिक्कतें आयीं उसे हम कतई आसानी से तो नहीं भुला सकते हैं।भगवान श्री राम की अयोध्या नगरी में भगवान
रामकी जन्मभूमि पर मंदिर के स्थान पर मस्जिद के निर्माण हो जाने से लेकर वापस पुनःरामलला के भव्य मंदिर बनने तक लगभग पांच सदियां यानी कि ५००साल बीत गये।और अयोध्या धाम तभी से आजतक विवादों का केंद्र बनकर रह गया था।
हिन्दू मुस्लिम वाद-विवाद से शुरू हुई यह कहानी कई वर्षों तक कोर्ट की फाइलों में घूमती रही। देश की सरकार भी कम जिम्मेदार नहीं रही।जब भारत परतंत्रता की बेड़ी को तोड़कर पूरी तरह से स्वतंत्र हो गया तो जो सरकार बनी वह इस मामले में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई।अगर सरकार चाही होती तो जब धर्म के नाम पर देश का बँटवारा कर दिया गया तो तभी रामजन्मभूमि का विवाद भी समाप्त कर दिया गया होता।लेकिन देश के हालात कुछ ऐसे थे कि यहाँ हिंदू मुस्लिम की वोटों की राजनीति शुरू हो गई और लोग सत्ता में बने रहने के लिए किसी को रुष्ट नहीं करना चाहते थे।मुकदमा कोर्ट में चलता रहा,, तारीखें पड़ती रही।न्यायालय के न्यायाधीशों के हाथ इसपर फैसला करने के लिए पूरी तरह से स्वतंत्र नहीं थे।कहीं न कहीं उनकी बेबशी साफ झलकती थी।जिससे वे चाहते हुए भी फैसला नहीं लिखरहे थे। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस विवादित जमीन का निपटारा किया, जिसके बाद राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ हो गया। अब मंदिर का लोकार्पण जनवरी माह की २२तारीख सन २०२४ को होने जा रहा है।
ऐसे में आइए जानते हैं कि बाबर से लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले और फिर राम मंदिर बनने में साल दर साल कब और क्या हुआ।
• सन् 1528 घटनाक्रम :-
बात उन दिनों की है जब मुगल शासन पूरे भारत में अपना विस्तार करने में जुटा हुआ था ।तभी यहाँ अयोध्या में एक ऐसी जगह पर मस्जिद बनाई गई,जहाँ हिन्दू समुदाय के लोगों ने भगवान श्रीराम जी की जन्मभूमि मानते रहे । उनका मानना था कि वहां भगवान राम का जन्म हुआ था। और वह अयोध्या नगरी का एक बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान था।जिस स्थान पर जबरन मुगलों द्वारा कब्जा कर लिया गया और उसपर मस्जिद का निर्माण करदिया गया।कहा जाता है कि मुगल सम्राट बाबर ने यह मस्जिद बनवाई थी। जिसे बाबरी मस्जिद कहा जाता रहा।जबकि हिन्दू समुदाय किसी भी हालत में उसे मस्जिद मानने को तैयार नहीं थे।बल्कि उसे एक ढाँचा मानते हुए कोर्ट से मह अपील करते रहे कि उन्हें उनके पूजनीय भगवान राम की जन्मभूमि पर रामलला विराजमान रहें।
• 1853 में क्या हुआ
इस मुद्दे पर पहली बार दो समुदायों के बीच विवाद का जन्म हुआ। दस्तावेजों एवं अभिलेखों के अनुसार पहली बार हिंदुओं ने मुगल शासन के खिलाफ हिम्मत जुटाई और आरोप लगाया कि भगवान राम की जन्मभूमि में मंदिर को तोड़कर बाबरी मस्जिद का निर्माण हुआ हैऔर हिन्दू इसे कभी स्वीकार नहीं करेंगे।इस मुद्दे पर पहली बार हिंदुओं और मुसलमानों के बीच हिंसा शुरू हो गई ।और तब बहुत से हिन्दू मारे गये।
1885 में पहली बार कोर्ट में मुकदमा दायर किया गया
अंग्रेजों के शासन में मामला पहली बार सन् 1885 में कोर्ट पहुंचा।उस समय एक महंतजी थे जिनका नाम महंत रघुबर दास था, उन्होंने अदालत से मांग की कि चबूतरे पर मंदिर बनाने की इजाजत दी जाए।उनकी यह मांग खारिज हो गई। इसके बाद इस संबंध में ज्यादा कुछ नहीं हुआ और 6 दशक से ज्यादा समय तक मामले में एक तरह से धूल पड़ती रही।और मामले को मानों दबा दिया गया और लोग समय के साथ मजबूर हो चुके थे। सबकुछ सहन करना विवशता थी।उसके बाद एक बार फिर क्रांति की ज्वाला भड़कनी शुरू हुई।
1946 में मुस्लिम समुदाय खुद सिया और सुन्नी विवाद मे उलझ गया
बाबरी मस्जिद को लेकर शिया और सुन्नियों में विवाद ने जन्म ले लिया।ऐसा कहा गया कि बाबर सुन्नी था, इसलिए फैसला शियाओं के खिलाफ चला गया।
1949 में राम चबूतरे का निर्माण :
जुलाई 1949 ई. में उत्तर प्रदेश राज्य सरकार ने मस्जिद के बाहर राम चबूतरे पर राम मंदिर बनाने की कवायद शुरू की। लेकिन यह योजना भी नाकाम रही।कोई सफलता प्राप्त नहीं हो सकी।
• 1949 में कब क्या हुआ
सन १९४७ में अब तो देश पूरी तरह से आजाद हो चुका था। दिनांक 22-23 दिसंबर को मस्जिद रुपी ढाँचे में राम सीता और लक्ष्मण की मूर्तियां रखी गईं और मुर्तियाँ रख जाने से मुस्लिमों ने यहां नमाज पढ़ना बंद कर दिया।मंदिर में पूजा अर्चना शुरू हो गई।तब एक पक्ष विशेष को प्रसन्न करने और सत्ता में बने रहने के लिए राजनीतिक लाभ केलिए बाद में सरकार ने यहां ताला लगा दिया।
29 दिसंबर1949 को मंदिर की संपत्ति कुर्क कर ली और वहां रिसीवर बिठा दिया गया।
1950 में क्या कुछ हुआ?
इस जमीन के लिए सन् 1950 में अदालती लड़ाई का एक नया दौर शुरू होता है। इस तारीखी मुकदमे में जमीन के सारे दावेदार 1950 के बाद के थे।
16 जनवरी 1950 ई. को गोपाल दास विशारद कोर्ट ने कहा कि मूर्तियां वहां से न हटाई जाएं और बिना रुकावट के पूजा जारी रखी जाए। कोर्ट ने कहा- मूर्तियां नहीं हटेंगी, लेकिन ताला बंद रहेगा और पूजा सिर्फ पुजारी करेगा। जनता बाहर से दर्शन करेगी।यह भी हिन्दुओं के हित में ही रहा ।क्योंकि उस समय उस कथित बाबरी मस्जिद में मुर्तियों के रखे जाने से वह अब मंदिर बन गया था।
1959 में हिन्दुओं का दावा
निर्मोही अखाड़े ने सन् 1959 ई. कोर्ट में पहुंच कर दावा पेश किया तो मुकदमों की झड़ी लगती चली गई।
• 1961: 18 दिसंबर को उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड ने विवादित स्थल के मालिकाना हक के लिए मुकदमा दर्ज कराया।
• 1984: विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने विवादित स्थल का ताला खोलने की मांग करते हुए एक विशाल मंदिर के निर्माण के लिए अभियान की शुरुआत की।और तभी VHP ने एक समिति का गठन भी किया।
• 1986: 1 फरवरी को फैजाबाद कोर्ट के फैसले से हिंदुओं को राहत मिली। विवादित स्थल पर हिंदुओं को पूजा करने की इजाजत दे दी गई। फैसले के बाद विवादित ढांचे का ताला दोबारा खोला गया।
ताला खोलने के आदेश जारी क्या हुये, इससे नाराज मुसलमानों ने विरोध में बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी का गठन किया।
• 1989: 1 जुलाई सन 1989 को भगवान रामलला विराजमान नाम से पांचवां मुकदमा दर्ज किया गया। यह केस वीएचपी(विश्व हिन्दू परिषद) नेता देवकीनंदन अग्रवाल ने दायर किया।
• 1989 : उसकेबाद 9 नवंबर 1989 को उस समय देश के प्रधानमंत्री रहे राजीव गांधी की सरकार ने विवादित स्थल के पास ही राममंदिर के शिलान्यास की इजाजत दे दी।
• 1990 : 25 सितंबर 1990 को बीजेपी नेता लालकृष्ण आडवाणी ने सोमनाथ से एक रथ यात्रा शुरू की। इस यात्रा को अयोध्या तक जाना था। इस रथयात्रा से पूरे मुल्क में एक जुनून पैदा किया गया। जिसकी वजह से गुजरात, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश में दंगे भड़क गए। कई इलाके कर्फ्यू लगाना पड़ गया।
• 1990 में लाल कृष्ण आडवाणी को 23 अक्टूबर को बिहार में लालू यादव ने गिरफ्तार करवा लिया।
जून 1991 में उत्तर प्रदेश में आम चुनाव की घोषणा हुई जिसमें भारतीय जनता पार्टी बहुमत में आ गई।
• 1992: अबतक हिन्दुओं के भीतर रामजन्मभूमि के नाम पर भगवान श्री राम के मंदिर के लिए उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी ने चुनाव जीतकर सत्ता में आ चुकी थी।और तत्कालीन मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश माननीय श्री कल्याण सिंह जी के कार्य काल में ही राम के दिवाने कारसेवक उस विवादित ढाँचे के गुंबद पर चढ़ गए और गुम्बद को तोड़कर गिरा दिया और वहां भगवा ध्वज फहरादिया। इसके बाद तो दंगे भड़क गए।उस समय सपा मुखिया माननीय मुलायम सिंह यादव केंद्र सरकार में रक्षा मंत्री थे।उन्होंने जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री कल्याण सिंह जी से अयोध्या का हाल पूछा और कहा कि क्या यह सही है कि कुछ लोग गुंबद पर चढ़ गए हैं तो कल्याण सिंह जी ने बड़ी शालीनता से उत्तर दिया कि हमें तो पता चला है कि भीड़ ने ढांचे को तोड़ भी दिया है और उन्होंने वह सारी जिम्मेदारी अपने माथे पर लेली।बस इतना ही काफी था।मुलायम सिंह ने तुरन्त कारसेवकों पर गोली चलाने का आदेश जारी कर दिया।परिणाम यह निकला कि बहुत से लोग इस दौरान मौत के घाट उतार दिये गए।बहुत से लोग भीड़ से कुचल दिये गये।लोगों की लाशें मारमार कर सरयू नदी में बहा दी गई।साधुसंतों के अलावा भारी मात्रा में कारसेवकों ने बलिदान दे दिया, भगवान श्रीराम के नाम पर।
• 1992 : 30-31 अक्टूबर सन 1992 को धर्म संसद में कारसेवा की घोषणा हुई।
• 1992 : नवंबर में कल्याण सिंह ने अदालत में मस्जिद की हिफाजत करने का हलफनामा दिया।लेकिन उसके अगले ही महीने में राम के दिवाने कार सेवक के रूप में अयोध्या में आ धमके।
• 1992 : 06 दिसंबर वह दिन था, जिसके लिए राममंदिर आंदोलन सबसे ज्यादा चर्चा में रहा है।इस दिन हजारों की संख्या में कारसेवक अयोध्या पहुंचे। लाखों कारसेवकों ने बाबरी ढाचे को गिरा दिया। कारसेवक 11 बजकर 50 मिनट पर ढाचे के गुंबद पर चढ़े। करीब 4.30 बजे मस्जिद का तीसरा गुंबद भी गिर गया।
• बाबरी मस्जिद का ढांचा गिराए जाने के बाद देशभर में दंगे भड़क उठे। इसी दौरान जल्दबाजी में एक अस्थायी राममंदिर बनाया गया और तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव ने मस्जिद के पुननिर्माण का वादा भी किया।
• 2002 : अप्रैल में विवादित स्थल पर मालिकाना हक को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट के तीन जजों की पीठ ने सुनवाई शुरू की।
• 2003: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने झगड़े वाली जगह पर खुदाई करवाई ताकि पता चल सके कि क्या वहां पर कोई राम मंदिर था।
• 2005: जुलाई में यहां आतंकवादी हमला भी हुआ। लेकिन आतंकवादी वहां कुछ नुकसान नहीं कर सके और मारे गए।आतंकवादियों ने विवादित स्थल पर विस्फोटक से भरी एक जीप का इस्तेमाल किया। सुरक्षा बलों ने मुठभेड़ में सभी 5 आतंकियों को मार गिराया।
• 2010 : 30 सितंबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया। जिसमें विवादित स्थल को तीन बराबर हिस्सों में सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला में बांटा गया।
• 2017 : 21 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद में मध्यस्थता की पेशकश की। चीफ जस्टिस जेएस खेहर ने पेशकश की कि अगर दोनों पक्ष राजी हों तो वह कोर्ट के बाहर मध्यस्थता के लिए भी तैयार हैं।
• 2018 : 8 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवादित स्थल के लिए सिविल अपील पर सुनवाई शुरू हुई।
• 2019 : 8 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने पांच जजों की एक संविधान पीठ बनाई, जिसका नेतृत्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई कर रहे थे. इसमें अन्य चार जज जस्टिस एसए बोबड़े, जस्टिस एनवी रमना, जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ थे।
• 2019 : 8 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को बातचीत से सुलझाने का फैसला किया और इसके लिए तीन सदस्यीय मध्यस्थता समिति का गठन कर दिया।
• 2019 : 9 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने हिंदुओं को पक्ष में फैसला सुनाया और पूरी विवादित जमीन सौंप दी. मुस्लिम पक्ष को भी इस जगह से दूर मस्जिद देने का आदेश सुनाया गया।
• 2020 : 5 अगस्त को राम मंदिर के लिए भूमि पूजन का कार्यक्रम रखा गया. पीएम नरेंद्र मोदी के हाथों अयोध्या में भव्य राम मंदिर का भूमि पूजन हुआ. इस तरह से अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की शुरुआत हुई।
• 2024 : 22 जनवरी को अयोध्या में बनकर तैयार हुए भव्य राममंदिर का उद्घाटन और मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा होगी।यह सब भारतीय जनता पार्टी, विश्व हिंदू परिषद और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ द्वारा निर्धारित प्रारूप तैयार कर किया जा रहा है। मकर संक्रांति के दिन से ही विधिवत पूजा पाठ शुरू कर दिया जायेगा और 22जनवरी2024को भगवान रामलला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा सम्पन्न होने को है।
लेबल: अयोध्या धाम, कब और क्या, रामजन्मभूमि



