अजब प्रेम की गजब कहानियां
सरहदों के बीच बढ़ती दूरियाँ कभी दोस्ती तो कभी दुश्मनी भी एहसास कराती रहती हैं।यह दुनियां जब से आबाद है।हमेशा कुछ नयेनये किस्से कहानियों में प्रेम के अलग अलग रूप देखने को मिलते रहे।सुनने में आते रहे।ऐसा नहीं है कि यह सब पुराने युग की बात है।यह तो हर युग की बात है और हमेशा ऐसा होता रहा है।
कभी लैला मजनूँ की गाथा ने दुनियां के सामने अपने जलते हुए अरमान को यूँ ही रौंदते देखा।लोगों ने उनकी एक न सूनी।ठोकरें मारमार कर उन्हें बेहाल कर दिया। लोग मारते तो कैस को थे लेकिन दर्द तो कैस और लैला दोनों को हो रहा था।
फिर सीरी और फरहाद के प्रेम ग्रंथों को भी लोगों ने पढ़ा सुना।और हीर राँझा की कहानियां भी किसी से छुपी नहीं रह सकीं।
ःयेतो हुई कुछ पुरानी प्रेम कहानियां जो किताबों में लिखी गई थीं और फिल्में बनीं थीं।लेकिन आजके इस आधुनिक युग में भी ऐसी तमाम कहानियां जीवंत हुई हैं और लोगों ने अपनी इन आँखों के सामने घटित होते हुए भी देखा है।
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कुछ ऐसी ही प्रेम कहानी भारत और पाकिस्तान के बीच दो दिल मोबाइल पर गेमिंग के दौरान कब एक दूसरे को अपना दिल हार बैठे कि उनकी मोहब्बत को दो दुश्मन देशों की सरहदें भी रोक न सकीं।किसी भी तरीक़े को अपना कर वे एक होना चाहते थे लेकिन कुछ दिक्कतें उन्हें मिलने से रोक रही थीं।लेकिन प्यार तो प्यार होता है और जब यह दिल को अपनी आगोश में ले लेता है तो उस समय वह कुछ भी कर गुजरने की हिम्मत भी रखता है।
यह कहानी थी एक पाकिस्तानी महिला की जो शादी शुदा तो थी ही, साथ में चार चार बच्चों की माँ।क्या कहेंगे इसे ?क्या यह उम्र उनके किसी गैर मर्द से दिल लगाने की उम्र थी?लेकिन यहाँ तो दिल भी लग गया और इश्क भी हो गया।पहले पति के घर को छोड़कर नये जीवन साथी की तलाश में सीमा ने सीमा को पार करते हुए सचिन नामक अपने कँवारे दुबले पतले आशिक के लिए अपने पति को छोड़ा,उसका घरबार छोड़ा,अपना देश छोड़ा और अंत में अपना धर्म भी छोड़दिया।
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अब यहाँ भारत में ही एक और ऐसी ही प्रेम कहानी निकल कर आती है जो भारत के राजस्थान प्रांत में शुरू हो कर पाकिस्तान तक जाती है।और यह कहानी भी कम दिलचस्प नहीं है।राजस्थान की एक शादी शुदा महिला वह भी बालबच्चेदार जब सीमा के प्यार की कहानी सुनती है तो कि एक चार बच्चों की माँ अपने पति को छोड़कर बच्चों को साथ लेकर अपने प्रेमी से मिलने और शादी करने के लिए किस तरह से सरहद पार करने में कामयाब हो जाती है तो इस राजस्थान की अंजू नामक उस लड़की ने बकायदा सरकार से बीजा लेकर अपने प्रेम की अलख जगाने पाकिस्तान जाती है।यह अंजू भी सीमा की तरह ही अपने एक कथित प्रेमी जिसका नाम नसरुल्लाह बताया गया, उसके साथ बकायदा निकाह करती है और अपना धर्म भी छोड़कर इस्लाम धर्म को अपना लेती है।
वहाँ पाकिस्तान में इसकी खूब आवभगत भी की जाती है और लोग इसे मुस्लिम धर्म अपनाने से खुश होकर खूब चंदा इकट्ठे करके इसे तोहफा भी देते हैं।।लगभग चार महीने पाकिस्तानी युवाओं के साथ मौजमस्ती करने के बाद अंजू फिर भारत लौट आती है तो यहाँ पर भी माहौल गरम हो जाता है।घरवाले उसके माता पिता और पति किसी भी हाल में उसे घर में घुसने की इजाजत नहीं देना चाहते।
सही भी है कि जिसने बिना कुछ सोचे घर परिवार की इज्ज़त को भरे बाजार में नीलाम कर दिया हो,उससे हमदर्दी कैसी?और जब चली ही गई तो आयी ही क्यों?अगर बच्चों की मोहब्बत खींच लाई तो क्या तब बच्चों का मोह नहीं लगा जब उन्हें छोड़कर चली गई।
चूंकि भारत और पाकिस्तान के आपसी संम्बंध काफी खराब चल रहे हैं तो इसलिए भारत से कोई पाकिस्तान जाये या वहाँ से कोई पाकिस्तानी भारत में कदम रखेगा तो शक की नजरों से ही देखा जायेगा।
यह प्रेम अगर किसी कँवारे जोड़े का होता तो भी कुछ समझ में आता, लेकिन चार चार पाँच पाँच बच्चों की अम्मा अपनी हवस मिटाने के लिए इधर उधर घूमती फिरेगी तो समाज के लिए बहुत बुरा प्रभाव डाल सकता है।
प्यार करने की कोई उमर नहीं होती
इसके लिए हमें भारत से पाकिस्तान जाकर वहां इस्लाम धर्म अपनाने के साथ एक पाकिस्तानी लड़के से शादी करने वाली अंजू और नशरुल्ला के कहानी पर गौर करना होगा।अंजू कोई कँवारी लड़की नहीं है।लेकिन जज्बात में आकर उसने मर्यादा की हद को पार किया और अपने बच्चों को छोड़कर गैर मुल्क में जाकर अपने प्यार का इजहार किया।
इसके पहले पाकिस्तानी वुमन जिसे लोग सीमा हैदर के नाम से जानते हैं।वह मोबाइल पर गेमिंग के दौरान अपना दिल एक हिन्दुस्तानी के संग हार गई।और पति विदेश में नौकरी कर रहा था।यह सीमा घर में जब अकेली रहती तो आशिक मिजाज अपने सचिन नामक एक लड़के से चैटिंग और गेमिंग करते करते इतनी व्याकुल हो जाती है कि पाकिस्तान से अपने सभी चारों बच्चों को साथ लेकर चोरी छिपे भारत में अपने प्रेमी के पास आ जाती है और।जब इसकी भनक पुलिस को लगती है तो बकायदा पुलिस उन्हें रिमांड पर लेकर खूब पूछताछ करने के बाद साथ साथ दोनों प्रेमियों को रहने की मंजूरी दे देती है।
इसलिए यह कहना कोई गलत नहीं होगा कि प्यार करने की कोई उमर नहीं होती।
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प्यार कभी भी, किसी भी उमर में किसी को भी हो सकता है।बस उसका जमीर जिंदा होना चाहिये।
अगर ऐसा नहीं होता तो बूढ़े दादा दादी, नाना नानी अपने पोते पोतियों या नातिन और नातियों के प्रति इतने लगाव क्यों रखते।लेकिन आपने अक्सर देखा होगा कि।कुछ मासूम से बच्चे जिन्हें आप खूब प्यार करते हैं वे आपको कहीं भी आते जाते देखते हैं तो तुरंत ही आपके साथ जाने की जिद करने लगते हैं।उन्हें आपके प्रति वह लगाव उन्हें ऐसा करने की चाहत पैदा देता है और आप लाख मना करो,उन्हें मारो पीटो फिर भी कुछ बच्चे अपनी मां से दूर और उनसे अलग बिल्कुल नहीं होना चाहते।और रोते रोते सो जाते हैं।यह उनका प्यार ही तो है।उन्हें कोई समझ नहीं है।कोई हानि लाभ नहीं है लेकिन मोहब्बत तो देखो।
इसीलिए कहा जाता है कि प्यार करने की कोई उमर नहीं होती।प्यार एक ऐसा खेल है जो अपने आप किसी को भी किसी से भी हो जाता है।
दिल कब किसे और क्यों चाहने लगता है दिल को भी पता नहीं होता
बात जब दो दिलों के प्यार करने की हो तो यह जरूरी नहीं होता कि किसे किसने प्यार किया।क्योंकि प्यार तो बिना कुछ किये ही हो जाता है।और जब यह रोज रोज का मिलना दिल में एक ऐसी जगह बना लेता है कि बिना देखे मन का शुकून जाने लगेऔर एक नजर उस खासम खास की झलक देखने को जब यह दिल बेचैन हो उठता है तो वहाँ प्यार है।माता पिता का अपने बच्चों के प्रति, बाई बहन के साथ मित्रों के साथ जाने अनजाने किसी के साथ किसी को हो जाता है लेकिन।दो प्रेमी जोड़े जब एक ही वर्ग समुदाय और मानवी प्रवृत्ति के होते हैं तो वह कुछ खास होता है।
कुछ पशु पक्षियों के प्रेमी होते हैं जो उनके साथ इतना घुलमिल जाते हैं कि वे उनके बिना नहीं रह पाते। प्यार में ऐसी ताकत होती है।
ये है एक छोटी सी घटना जो कभी सुर्खियों में थी।
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इसके बाद एक बार फिर एक इंसान और एक पंक्षी ने अपने दिल को एक दूसरे के साथ इस कदर लगाया कि वह भी लोगों के लिए एक मिशाल बन.गया।
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सच्चा प्यार तो दिल से होता है
सच्चे मन से जब किसी को कोई चाहता है तो यह नि:स्वार्थ प्रेम कहलाता है।और यह दिल से होता है और आत्मा तक इसकी गूंज सुनाई देती है। यह प्यार किसी प्रेमी और प्रेमिकाओं के प्रेम से कुछ अलग ही होता है।
यह भी एक प्यार का ही रिश्ता है जो किसी को भी किसी से भी हो सकता है।किसी के चाहने न चाहने से उसपर कोई असर नहीं होता।
पशु पक्षियों के प्रति लगाव भी उनके प्यार को दर्शाता है।और दो दिल मिलकर जब एक जान बन जाते हैं तो उनके प्रेम की गाथा लिख दी जाती है और वह एक अमर प्रेम की अमर कहानी बन जाती है।
यहाँ पर ऊँचनीच, जातिपाँति, भेदभाव, छोटा बड़ा, अमीरी गरीबी कुछ भी मायने नहीं रखती।बस हम तुम और बीच में कोई दीवार नहीं।एक अलग ही अहसास होता होगा मन में जब सारी दुनियां एक तरफ और दो दिल तमाम दुश्वारियों को झेलते हुए भी अलग न होने की जिद पर अड़े होते हैं और उन्हें दुनियां की कोई ताकत तोड़ नहीं पाती और फिर मजबूर होकर वे प्रेमी इस दुनियाँ को अलविदा कहदेते हैं।
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बहुत ही मुश्किल होता है तब जिंदगी का।इसलिए प्यार की वह.ताकत जिसके सामने दुनियाँ नत मस्तक हो जाती वह मुहब्बत दिल से होती है।
आँखों की लगाई आग में दिल जब जलता है
यह प्यार और इश्क का खेल तो चलता रहता है।यहां सबसे बड़ी गुनहगार तो ये आँखें होती हैं।आँखों की अगुवाई से शुरू होने वाली प्रेम कहानी में जब दिल बेचारा फंस जाता है तो आँखों को कोई फर्क नहीं पड़ता है लेकिन दिल की धड़कनें बढ़ने लगती हैं।
हिन्दी के सुप्रसिद्ध कवि बिहारी लाल ने अपनी बिहारी सतसई में एक दोहा इस प्रेम प्रसंग को ऐसे ही कुछ लिखा था
क्यों बसिये, क्यों निबहिये, नीति नेहपुर नाहिं।
लगालगी लोइन करैं, नाहक मन बंधि जाय।।
शायद आँखों की इस तरह आशिकी में बेचारे दिल को सब झेलना पड़ता है।
आसान नहीं होता प्यार करके निभाना
जब दिल किसी को भाता है तो वह हर रिश्ता भूल जाता है।उसके लिए सिर्फ उसका प्यार ही सबकुछ होता है।यह कब ,किसे,क्यों और होता है किसी को पता नहीं होता।और जब पता चलता है तबतक बहुत देर हो चुकी होती है।
प्यार करनेवालों के दुश्मन हजारों होते हैं। पहला तो यह समाज है जो कभी दो प्यार करनेवालों को नहीं समझता।समाज बिना किसी सामाजिक और मान्य रिश्ते के दोप्रेमियों को कभी स्वीकार नहीं करता है।उनके सम्पर्क में आनेवाले बच्चों के भी बिगड़ने का भय बन जाता है।
माता पिता अपनी संतान के दुश्मन तो होते नहीं।समय आने पर हर माता पिता अपने बच्चों का घर बसाने के लिए उनके शादी विवाह कर देना चाहते हैं लेकिन परिस्थितियों के अनुकूल न होने के कारण कुछ देरी हो सकती है।लेकिन आजकल के कुछ बच्चे जवानी की दहलीज पर कदम रखते ही शारीरिक संम्बंध बनाने को उत्सुक होने लगते हैं।गलत संगति में पड़कर उनके कदम बहकने लगते हैं और इसी जिश्म की भूख और प्यास को बुझाने के लिए जो रास्ते पकड़ते हैं आजकल के लोग उसे ही प्यार का नाम लेकर बदनाम कर देते हैं।
सच्चाई तो यह है कि वाकई यह कोई प्यार व्यार नहीं होता।है और जैसे ही इन्हें कोई ऐसे कृत्य करते देख लेता है या ये पकड़ लिए जाते हैं तो सारा इश्क का भूत यहीं छोड़कर फूर हो जाता है।
लेकिन जब कोई किसी से सच्चे मन से प्यार करता है और उसका लगाव उसके साथ सिर्फ सम्बन्ध बनाने या संभोग करने की इच्छा से परे हटकर उसके साथ दिल का रिश्ता जोड़ता है।उसे सिर्फ एकनजर देखने के लिए लालायित रहते हैं।बिना देखे, बिना बातें किये भूखप्यास सब भूल जायें, देखते ही मानों सारी भूख मर जाये।बिना खाये ही पेट भर जाये।बिना कुछ कहे बहुत कुछ बातें हो जाये तो समझो कि दिल ने दिल को याद किया है और यहाँ पर प्यार हुआ है।
अब जब इतना लगाव बन जाता है तो अगर कोई इसके खिलाफ जाकर कुछ करना चाहता है तो मुश्किल होता है और।अब जब कोई एक दूसरे के बिना रह नहीं सकता और कोई उन्हें अलग कर देता है तो यह उनदोनों प्रेमी युगल के लिए कष्टकारी बन जाता है।दोनों का अलग होना नामुमकिन सा होता है और आप उन्हें अलग करके उनकी
अक्सर टूट जाती हैं प्यार वाली शादियाँ
लोग एक दूसरे से प्यार करते हुए जब शादी करने की बारी आती है तो बहुत से लड़के पीछे हटने लगते हैं।क्योंकि उन्हें तो उनसे कभी प्यार था ही नहीं।लड़कियाँ जिसे पाने के लिए उसका प्यार समझती रहती हैं, वो एक धोखा होता है।
लड़कियों को पटाने के लिए लड़कों द्वारा बिछाया गया एक जाल होता है जिसे आजकल की मासूम लड़कियाँ समझ नहीं पातीं हैं और उनके लिए अपनी जवानी को सौंप कर अपना सौंदर्य पूर्व यौवन लुटा देती हैं। इससे उनका ही नहीं बल्कि उस माता पिता एवं भाई बहनों के साथ ही पूरे परिवार की इज्ज़त पर एक ऐसा कालिख पोत जाती हैं जिसे किसी भी प्रकार से धोकर छुपाया नहीं जा सकता।
आजकल के लड़के लड़कियों को फँसाने के लिए उनके ऊपर खर्च भी दिल खोलकर करने से नहीं हिचकते।अगर पास में पैसे न हो तो घर से झूठे बहाने बना कर पैसे लाते हैं, दोस्तों से उधार ले लेते हैं और अगर सनक सवार हो सिर पर किसी का जिस्म पाने की तो चोरी छिनैती कुछ भी कर सकते हैं लेकिन अपनी उस झूठे प्रेम को दर्शाने के लिए अपनी धाक जमाना उन्हें अच्छा लगता है।
अब जो बच्चियाँ अपने लोकलाज खोने से पहले अगर शादी की शर्त रख देती हैं और जब वे कहती हैं कि हम आपके साथ तभी सम्बन्ध बनाने देंगी, जब आप हमसे शादी करने का वादा करोगे।तो सभी लड़के तुरंत इसके लिए तैयार हो जाते हैं और उन शादी की शर्त रखने वाली लड़कियों के जिश्म से खूब जी भरके खेलते हैं।लेकिन अगर कोई लड़की इसी बीच गर्भवती हो जाती है तो उसके सारे भूत उतर जाते हैं।और अक्सर नब्बे प्रतिशत लड़के इस शादी से साफ इंकार कर जाते हैं।तब उन भोली भाली लड़कियों को एहसास होता है कि उन्होंने यह बहुत गलत किया।।बहुत सी लड़कियाँ आत्महत्या तक कर लेती हैं तो बहुत सी माँ बनने से पहले इस दुनियां में आने के लिए बेताब उसस मासूम को अपने गर्भ में ही मार डालती हैं।
लेकिन जो लोग प्यार करके शादी कर लेते हैं तो उनकी जिंदगी में जहर कैसे घुलता है, आओ इसपर अपनी चर्चा करते हैं।
शादी से पहले हर युवा लड़कियों के हर इशारे पर नाचता है।महगी शापिंग, मँहगे होटल में जाने के साथ साथ हर ख्वाहिश पूरी करने की कोशिश करना पड़ता है लेकिन जब यह रिश्ता पति पत्नी का बन जाता है तो अक्सर जो भी सामान घर में नहीं होता है और पत्नी लाने को बोलती है तो हजारों बहाने शुरू हो जाते हैं कि चलो कल आ जायेगा।आज पैसे नहीं है। बाद में देखते हैं।अभी तो लाये थे,कितना खर्च हैं तुम्हारे।कुछ बचत भी करना सीखो।बस यहीं से मनमुटाव बढ़ने लगता है कि जो प्रेमी उसके जुबान खुलने से पहले ही उसकी बातें समझ जाता था और बिना माँगे सब हाजिर कर देता था, उसकी एक झलक पाने के लिए दीवाना बना घूमता था,आज नजरें चुरा रहा है।झगड़ा होना ही होना है।
बस दिन बदिन रोज नोकझोंक परिवार में कलह कराने वाली हो जाती है और एक दिन यह पवित्र रिश्ता टूट जाता है।
प्यार करके शादी करने से अच्छा है कि शादी करके लायी गयी पत्नी को इतना प्यार दें कि वह एक प्रेमिका लगने लगे
जी, अगर आप हमारे साथ जुड़कर हमारी सोच और हमारी संस्कृति और हमारी कविताओं और कहानियों में रुचि रखते हैं तो तो शायद यह हमारी जो विचारधारा है शायद आपको दिल तक छू जाये।
यह कहानी उन नव दम्पतियों के लिए ज्यादा महत्वपूर्ण साबित हो सकती है जिनका अभी विवाह नहीं है या अभी हाल ही में हुआ है।जो कभी किसी के प्यार में फँसकर अपनी जिन्दगी को तबाह करने वाले हैं या तबाह हो चुके हैं।सबके लिए यह प्रेरणादायक साबित हो सकती है।
हर माता पिता को अपने बच्चों को लेकर मन में एक आशा और विश्वास होता है कि उसके बच्चे बड़े होकर उसका नाम रोशन करेंगे।आज जिसे बच्चे को लोग माता पिता के नाम से जानते हैं, कल वे उसके नाम से जाने जायेंगे।तो दिल खुशी से झूम उठेगा।लेकिन जब उन बच्चों के कर्म अच्छे होंगे तब।न कि बच्चे कहीं गलती करके आयें और लोग कहें कि येही इनके बाप हैं।देख लो, इन्होंने कैसे संस्कार दिया था अपने बच्चों को।
बड़ा फर्क होता है दोनों में।
जब एक नयी उमर के लड़के लड़कियाँ आपस में मिलते हैं तो जब वे बाल्यावस्था से आगे बढ़ने वाली उमर में होते हैं तो नयी उमंगें हिलोरें मारने लगती हैं।लड़कियों के शरीर में तेजी से परिवर्तन होने लगता है और उनके स्तनों का उभार बढ़ने लगता है तो उनके तन की की सुंदरता लोगों को अनायास ही आकर्षित करने लगती है।लोगों का विपरीत सेक्स के प्रति यह जो आकर्षण होता है बढ़ जाता है और अब इस उमर में जो लड़के या लड़कियाँ अपने आप को सम्हाल नहीं पाते और कदम बहक जाते हैं।वे क्षणभर के मानसिक और शारीरिक सुखद अनुभूति की प्राप्ति के लिए सबकुछ भूलकर एक ऐसी राह पर चले जाते हैं, जहाँ से पीछे मुड़कर देखने पर सिर्फ बदनामी और बेइज्जती के सिवा कुछ भी दिखाई नहीं देता।
यहाँ पर एक मर्यादा होती है जो लोकलाज का भय दिखाकर इस नरक में डूबने से बचाती है।पशुओं में इसी बात की कमी होती है और अगर मनुष्य भी वैसा ही आचरण करने लगे तो मनुष्य और जानवर में भेद कैसा रह जायेगा।
मनुष्य के रुप में यदि जन्म हुआ है तो उसके कुछ सामाजिक नियम भी बने हुए हैं।जिसे निभाना होता है। समाज में विवाह एक संस्कार पैदा करता है और विवाह करके घर में आयी हुई पत्नी को यदि कोई पुरुष उसका पति अपनी पत्नी को अपनी प्रेमिका बना कर उससे प्रेम करना शुरू कर दे,और पत्नी भी अपने पति को परमेश्वर माने या न माने अपना प्रेमी बना ले तो यही दाम्पत्य जीवन इतना सुखमय हो जायेगा, जिसकी कोई कल्पना नहीं की जा सकती।
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