गुरुवार, 2 जनवरी 2025

घने जंगलों के बीच बसा संसार

घने जंगलों के बीच बसा संसार,
जहाँ झरने गाते हैं, अपनी मधुर पुकार।
पहाड़ों की चोटी से गिरतीं धाराएं,
जैसे अम्बर से धरा पर अमृत बरसाएं।

हरियाली के आँचल में सजी ये भूमि,
जहाँ हर प्राणी की कहानी अनोखी।
पक्षी गाते हैं, हवा में तैरते गीत,
पर छुपे हैं खतरे, जो लाते हैं भय की रीत।

झरनों का गीत
झर-झर बहते झरने, चट्टानों से खेलें,
धारा की हर बूँद, कहानी ये कहे।
कभी शांत, कभी उग्र ये जलधारा,
जीवन का स्रोत, पर ले ले सहारा।

इनकी चमक में छुपी एक गहरी बात,
जहाँ नीचे बसा है, शिकारी का वास।
पानी पीने आए, हर जीव सतर्क,
क्योंकि पास ही दुबका है, बाघ सा भयंकर।

पहाड़ों की महिमा
ऊँचे पहाड़, जो बादलों को छूते,
जहाँ हवाओं के झोंके गीत अनूठे।
शांत दिखते, पर इनके भीतर आग,
फिसलते पत्थर, बन जाते हैं सजा का भाग।

इनकी घाटियों में गूंजे शेर की दहाड़,
हर कदम कहता, संभल के, ये है पहाड़।
यहाँ छुपे शिकारी, अदृश्य साये,
जंगल के नियम, सबको सिखाए।

हिंसक जानवरों का संसार
यहाँ बाघ की चाल, चीते की फुर्ती,
भेड़िए के झुंड की है रणनीति सजी।
सन्नाटा तोड़ती है कभी हिंसक गरज,
हर पत्ता कहता है, संभल और नजर रख।

पर यही तो है जंगल का जीवन,
जहाँ सबका नियम है, प्रकृति का संतुलन।
माँद में आराम करते भालू भी दिखते,
तो कभी गुफाओं में साँप छुपे रहते।

जंगल का संदेश
ओ यात्री, जो आया इस भूमि पर,
समझ ले प्रकृति के हर चरित्र का स्वर।
झरने, पहाड़, जंगल का ये मेल,
संग लाते हैं शांति, तो कभी कड़वा खेल।

यहाँ जीवन चलता, मृत्यु के संग,
प्रकृति के नियम, कठोर और प्रबल।
हिंसा और शांति का यही है खेल,
जो समझ ले इसे, वही बने महान।

अंतिम प्रार्थना
ओ जंगल, ओ प्रकृति के रक्षक,
तेरे अंश हैं हम, तेरे प्रेम के पात्र।
झरनों की शीतलता, पहाड़ों का बल,
हमें सिखाते हैं, जीवन का असली पल।

इसलिए बचाओ इन्हें, इनका हर रूप,
हिंसक हो या शांत, हर अंश है खूब।
जंगल के इस गीत को गुनगुनाओ,
और प्रकृति की गोद को सहेजते जाओ।