भारत जैसे विकसित देश में धर्म के नाम पर हिंसा कोई नया नहीं है।बाहर से जेहाद के नाम पर आतंकी हमले।हिन्दुओं को काफिर कहकर उनके साथ मारपीट कर उन्हें समाप्त कर अपने को धन्य करने काजो फरमान उनके आकाओं द्वारा सिखाया जाता है, वह है क्या? आखिर धर्म के नाम पर मरने के लिए सदैव मुसलमान तैयार कैसे हो जाते हैं, जबकि हिन्दुओं को लाख समझाने के बाद भी उनके भीतर धर्म अपनी जगह नहीं बना पाता।
अगर हिन्दू अपने हिन्दुत्व पर अडिग रहा होता तो आज का वर्तमान भारत इतना सिकुड़ते हुए इतन संकुचित नहीं होता।अफगानिस्तान तक फैला हुआ भारत अफगानिस्तान छोड़ा, पाकिस्तान छोड़ा,बांग्लादेश छोड़ा और अभी पता नहीं क्या क्या छोड़ेगा।
जो धार्मिक गुरु मुसलमानों को इस्लाम के नाम पर हिन्दुओं को मारकर अल्लाह को खुश करने की शिक्षा देता है वह आखिर क्या है।
एक बात और है अक्सर देखने में आता है कि हिंदू लड़कियाँ मुस्लिम समुदाय के लड़कों के झूठे प्रेम जाल में फँसती जा रही हैं।जबकि अधिकाँशतः लड़कियों को उनके प्रेमी पति या बोटीबोटी काट डालते या तंदूर में जला देते हैं।फिर भी हिन्दू समुदाय की लड़कियों को पता नहीं अपने माता पिता के प्यार के आगे झूठा प्रेम अधिक भाता है।
जबकि उन्हें यह पता होता है कि इस्लाम में तीन तलाक एक ऐसी बुराई है जो कभी भी कोई पति अपनी पत्नी को तीन बार तलाक बोलकर छोड़ने की कुप्रथा रखता है।बाद में अगर उसी पत्नी को वह पति पुनः रखना चाहे तो इस्लाम उसे ऐसा नहीं करने की इजाजत देता है।उसके लिए बकायदा लोगों ने नियम बना रखा है ,हलाला।
हलाला एक ऐसी कुप्रथा है जो दूसरे पर पुरुष के साथ दूसरा विवाह करने के लिए मजबूर करता है और जब वह दूसरा पति तलाक देकर छोड़ेगा तो वह पत्नी पुनः अपने पुराने पति से निकाह या विवाह कर सकती है। हाथ की कठपुतली बना कर रखने वाले लोगों के प्रति कुछ बेशर्म हिन्दू लड़कियों को आखिर यह नरक ही इतना पसन्द क्यों है?
बात अगर सिनेमा जगत की की जाय तो तमाम हिन्दू लड़कियों ने मुस्लिम समुदाय के लड़कों से शादी रचाई है।आखिर क्यों? क्या सनातन धर्म से ज्यादा सुरक्षित इस्लाम है?